अब ऑनलाइन बीमा कंपनियों को अपने यहां 15 अगस्त तक एक कार्यदल बनाने का निर्देश दिया गया है। ये कार्यदल कंपनी की उन गतिविधियों की पहचान करेगा, जो कानून के खिलाफ हैं। सीबीआईआरसी ने कहा है कि इस प्रक्रिया से कंपनियों को आत्म-निरीक्षण करने और चीन के कानून के मुताबिक खुद को एडजस्ट करने का मौका मिलेगा। लेकिन जहां जरूरत होगी कंपनियों की जांच सीबीआईआरसी के अधिकारी करेंगे।
सीबीआईआरसी के मुताबिक चीन में 2020 के अंत तक 140 बीमा कंपनियां ऑनलाइन कारोबार कर रही थीं। ये कंपनियां हर साल चार करोड़ 60 लाख डॉलर की रकम प्रीमियम के रूप में वसूल रही हैं। यह चीन के कुल बीमा उद्योग का छह फीसदी हिस्सा है।
चीन सरकार ने इसी बुधवार को वित्तीय टेक्नोलॉजी (फिनटेक) से जुड़ी कंपनियों पर लगाम कसने की पहल की थी। इसके लिए उसने एक पंचवर्षीय योजना घोषित की है। सरकार ने इस दस सूत्रीय कार्यक्रम कहा है। इस योजना के तहत डिजिटल अर्थव्यवस्था, इंटरनेट फाइनेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डाटा और क्लाउड कंप्यूटिंग आदि जैसे क्षेत्र शामिल किए गए हैं। मकसद इन क्षेत्रों में एकाधिकार (मोनोपॉली) कायम होने से रोकना और विदेशी निवेश की निगरानी करना है।
चीन के कदमों से दुनियाभर के वित्तीय बाजारों में काफी हलचल है। इसकी वजह यह है कि बहुत से विदेशी निवेशकों ने भी चीनी कंपनियों में निवेश कर रखा है। अनुमान है कि हाल में शुरू हुई कार्रवाई के कारण शेयर बाजारों में चीन की कंपनियों को एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हो चुका है। ब्रिटिश पत्रिका द इकोनॉमिस्ट ने अपने ताजा अंक की कवर स्टोरी में चेतावनी दी है कि चीन जिस रास्ते पर चल रहा है, उससे उसकी टेक इंडस्ट्री अपनी धार खो सकती है।