ताइवान की मदद करने की वजह से चीन ने लिथुआनिया के साथ अपने राजनयिक संबंधों को नीचे कर दिया है। दरअसल, बाल्टिक देश ने ताइवान को अपने यहां एक प्रतिनिधित्व कार्यालय खोलने की अनुमति दे दी है और इसी वजह से चीन नाराज हो गया है। बता दें कि ताइवान पर चीन अपना दावा जताते आ रहा है, ऐसे में दूसरे देश की दखलअंदाजी उसे रास नहीं आ रहा है।
राजदूत को किया निष्कासित
नाराज चीन ने लिथुआनिया के राजदूत को निष्कासित करते हुए अपने देश वापस बुला लिया। चीन का का कहना है कि ताइवान के पास विदेशों के साथ संबंध स्थापित करने का कोई अधिकार नहीं है। चीन की यह प्रतिक्रिया ताइवान पर सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के दावे को लेकर उसकी संवेदनशीलता को दिखाती है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि दूतावास के दूसरे नंबर के अधिकारी स्तर तक संबंधों को कम किया जाएगा।
ताइवान ने लगाए गंभीर आरोप
इस बीच ताइवान रक्षा मंत्रालय ने रविवार को बयान जारी करते हुए कहा कि दो एच-6एस ने बाशी चैनल में उड़ान भरी। ये दोनों परमाणु बम गिराने वाले चीन के घातक विमान हैं। इससे पहले भी चीन कई दफे शक्ति प्रदर्शन और ताइवान को डराने की नीयत से लड़ाकू विमान ताइवान के आसमान पर उड़ा चुका है।
अमेरिका और जापान समेत सभी प्रमुख देशों के साथ ताइवान के संबंध
ताइवान एक गृह युद्ध के बाद 1949 में मुख्य भूभाग से राजनीतिक रूप से अलग हो गया था। ताइवान के महज 15 औपचारिक राजनयिक सहयोगी है लेकिन वह अपने व्यापार कार्यालयों के जरिए अमेरिका और जापान समेत सभी प्रमुख देशों के साथ अनौपचारिक संबंध रखता है।
ताइवान को एक संप्रभु देश मानने वाले देशों के साथ चीन के मतभेद
चीन उन देशों के साथ आधिकारिक संबंध रखने से इनकार करता है जो ताइवान को एक संप्रभु देश के तौर पर मान्यता देते हैं। उसने 15 देशों को ताइवान से संबंध खत्म करने के लिए राजी कर लिया है। इनमें से ज्यादातर अफ्रीका और लातिन अमेरिका में छोटे और गरीब देश हैं।
अमेरिका और जापान समेत कई सरकारों के ताइवान के साथ व्यापक वाणिज्यिक संबंध रखने के साथ ही बीजिंग के साथ भी आधिकारिक कूटनीतिक संबंध हैं। कई देशों के व्यापार कार्यालयों के जरिए ताइवान की लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार के साथ संबंध हैं। ये व्यापार कार्यालय अनौपचारिक दूतावासों के रूप में काम करते हैं।