चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंघे की इस हफ्ते हुई हो चि मिन्ह सिटी यात्रा के बाद वियतनाम की विदेश नीति को लेकर नए सिरे से कयास लगाए जा रहे हैं। वियतनाम का चीन से पुराना टकराव है। लेकिन अब चीन ने कहा है कि वियतनामी नेताओं ने वेई को आश्वासन दिया कि वियतनाम ऐसी किसी कोशिश का समर्थन नहीं करेगा, जिससे चीन को आंच पहुंचती हो। यहां वेई ने चीन के राष्ट्रपति न्गुयेन झुआन फुक और वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव न्गुयेन फु त्रोंग से मुलाकात की।
इस साल की शुरुआत में वियतनाम में नया नेतृत्व सामने आया। 76 वर्षीय त्रोंग को तीसरी बार कम्युनिस्ट पार्टी का महासचिव बनाया गया, लेकिन इस बार राष्ट्रपति का पद फुक को दिया गया। फुक का कम्युनिस्ट पार्टी में अभी भी दर्जा त्रोंग के बाद दूसरे नंबर का है। वेई की यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने सैनिक संबंधों को मजबूत करने और दक्षिण चीन सागर में विवाद को संभालने के लिए निकट सहयोग बढ़ाने का वादा किया। गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर में चीन और वियतनाम के बीच लंबे समय से क्षेत्र संबंधी विवाद चल रहा है।
चीन की जिनान यूनिवर्सिटी में दक्षिण-पूर्व एशियाई मामलों के विशेषज्ञ झांग मिंगलियांग ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बातचीत में ध्यान दिलाया कि वेई की वियतनामी नेताओं से हुई बैठक के बारे में दोनों देशों के मीडिया ने अलग-अलग ढंग से खबर दी।
विशेषज्ञों ने इसका अर्थ यह लगाया है कि दोनों पक्षों में सभी मुद्दों पर पूरी सहमति नहीं थी। लेकिन झांग का कहना है- ‘चीन के मामले में त्रोंग को अपेक्षाकृत नरम रुख वाला और फुक व्यावहारिक नजरिए वाला नेता माना जाता है। चीनी रक्षा मंत्री से हुई उनकी बातचीत संभवतः इस बात का संकेत है कि वियतनाम अब चीन की तरफ झुक रहा है, जो विदेश में नीति उसकी उच्चतर प्राथमिकता है।’