विवादित इलाके में किसी बड़े संघर्ष की बनी रहती है आशंका
'सेकंड थॉमस शोल' फिलीपींस के कब्जे में है, लेकिन चीन भी इस पर दावा करता है। यह दक्षिण चीन सागर के स्प्रैटली द्वीप समूह में एक जलमग्न चट्टान है। इसके चलते दोनों देशों के बीच शत्रुतापूर्ण झड़पें होती रही हैं। इस विवाद के चलते दोनों के बीच किसी बड़े संघर्ष की आशंका बनी रहती है, क्योंकि अमेरिका भी इस संघर्ष में शामिल हो सकता है।
दक्षिण चीन सागर में विवाद
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दोनों देशों के बीच क्या समझौता हुआ
फिलीपींस और चीनी राजनयिकों के बीच कई बैठकों और राजनयिक नोट के आदान-प्रदान के बाद आज मनीला में यह महत्वपूर्ण समझौता हुआ। इसका उद्देश्य किसी भी पक्ष के क्षेत्रीय दावों को स्वीकार किए बिना ऐसी व्यवस्था बनाना है, जो दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य हो। दोनों देशों के बीच वार्ता की जानकारी रखने वाले फिलीपींस के दो अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर इस सौदे की पुष्टि की। बाद में सरकार ने विवरण प्रदान किए बिना सौदे की घोषणा की और एक बयान जारी किया।
फिलीपींस के विदेश मंत्रालय ने बयान में क्या कहा
फिलीपींस के विदेश मंत्रालय ने कहा, "दोनों पक्ष दक्षिण चीन सागर में तनाव कम करने और मतभेदों को बाचतीव व विचार-विमर्श के जरिए सुलझाने की जरूरत को समझते हैं।" मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि यह समझौता दक्षिण चीन सागर में एक-दूसरे के रुख पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
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चीन का कई देशों के साथ सीमा विवाद
चीन का कई देशों के साथ जमीनी और समुद्री सीमाओं को लेकर विवाद है। जिनमें से कई दक्षिण चीन सागर में हैं। फिलीपींस के साथ इस महत्वपूर्ण समझौते से इस बात की उम्मीद जग सकती है कि बीजिंग अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों के साथ इसी तरह की व्यवस्था कर सकता है, ताकि अनसुलझे क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर किसी संघर्ष से बचा जा सके। हालांकि, यह देखना बाकि है कि क्या फिलीपींस के साथ यह समझौता सफलतापूर्वक लागू हो पाएगा और यह कितने समय तक चलेगा।