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मानवाधिकार परिषद बनी पश्चिम और चीन के बीच जुबानी जंग का अखाड़ा

Thu, 24 Jun 2021 04:45 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा

सार

परिषद की बैठक में तकरीबन 40 देशों ने परिषद की अध्यक्ष से मांग की है कि वे चीन के शिनजियांग प्रांत में उइघुर मुसलमानों के कथित दमन की जांच करने के लिए अपनी टीम भेजें...
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संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद - फोटो : Agency (File Photo)
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संयुक्त मानवाधिकार परिषद की बैठक में चीन ने खुद पर लगे तोहमत पर सफाई देने के बजाय दूसरों की खामियां गिनाने की रणनीति अपनाई है। परिषद की एक बैठक आव्रजन और आवास की समस्या पर हुई। उसमें चीन ने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा पर आरोप लगाया कि ये देश आव्रजकों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं। उसने कहा कि इस मामले में इन देशों का रिकॉर्ड बहुत खराब है। परिषद इस हफ्ते पश्चिमी देशों और चीन के बीच जुबानी जंग का अखाड़ा बन रही है। मंगलवार को पश्चिमी देशों ने हांगकांग, तिब्बत, और शियजियांग में मानवाधिकारों के हनन का सवाल उठा कर चीन पर हमला बोला था। बुधवार को चीन ने आव्रजकों के मसले पर जवाबी गोले दागे।

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परिषद की बैठक में तकरीबन 40 देशों ने परिषद की अध्यक्ष से मांग की है कि वे चीन के शिनजियांग प्रांत में उइघुर मुसलमानों के कथित दमन की जांच करने के लिए अपनी टीम भेजें। बैठक में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान और अमेरिका की तरफ से एक साझा बयान पढ़ा गया। इसमें कहा गया कि शिनजियांग में दस लाख से ज्यादा लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में रखा गया है। वहां उइघुर मुसलमानों की व्यापक निगरानी की जाती है। उनके बुनियादी अधिकारों और संस्कृति पर चीन ने पहरा बैठा रखा है। चीन ने इन आरोपों का खंडन किया। उसने कहा कि जिन हिरासत शिविरों का जिक्र साझा बयान में हुआ है, वे व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र हैं, जिनका मकसद धार्मिक चरमपंथ से लोगों को दूर करना है।

उसके पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की अध्यक्ष मिशेल बेशलेट ने उम्मीद जताई थी कि इस साल एक टीम शिनजियांग का दौरा करेगी, जो वहां मानव अधिकारों के हनन के आरोपों की जांच करेगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस टीम के दौरे से संबंधित शर्तों पर सहमति बन जाएगी। इस पर जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मिशन में चीन के प्रवक्ता लिउ यूयिन ने कहा कि ये दौरा दोस्ताना होगा, जिसका मकसद सहयोग बढ़ाना होगा। उन्होंने साफ किया कि ऐसे किसी जांच दल को दौरे की संभावना नहीं है, जो पहले से मान कर आए कि चीन दोषी है।
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इसके बाद बुधवार को चीन आक्रामक मुद्रा में दिखा। उसने आरोप लगाया कि पश्चिमी देश बाहर से आने वाले आव्रजकों के मानव अधिकारों का हनन कर रहे हैं। इस बारे में चीनी प्रतिनिधि ने कई मिसालें दीं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीन ने मानवाधिकारों के मसले पर अब सोची-समझी जवाबी हमले की रणनीति अपना रखी है। उसका मकसद ये संदेश देना होता है कि इस मसले पर कोई दूध का धुला नहीं है।

पिछले साल अमेरिका में एक ब्लैक नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों मौत के बाद चीन ने अमेरिका में रंगभेद को मसले को खूब उछाला था। लेकिन ये शायद पहला मौका है, जब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के मंच पर चीन ने पश्चिमी देशों को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस बार परिषद की बैठक में जैसी जुबानी जंग दिखी है, उसके मद्देनजर मानव अधिकारों की रक्षा जैसे अहम मुद्दे पर वैश्विक सहमति बनने की उम्मीद और घट गई है।

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