राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी और परंपरावादी कार्यकर्ता चार्ली किर्क की हत्या को अमेरिकी मीडिया न सिर्फ एक त्रासदी बल्कि ट्रंप के राजनीतिक प्रभाव पर सीधी चुनौती के रूप में देख रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला राष्ट्रपति ट्रंप, अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और उनके समर्थक नेटवर्क के लिए बड़ा झटका है। आगामी चुनावी माहौल में इस पर राजनीतिक विमर्श और तेज हो गया है। यह ध्रुवीकरण और अमेरिका की विभाजनकारी राजनीति का परिणाम भी हो सकती है। सीएनएन के मुताबिक किर्क की हत्या ट्रंप पर सीधा दबाव बनाती है, क्योंकि किर्क को उनके युवा कंजरवेटिव आंदोलन का चेहरा माना जाता था। सवाल ये है कि क्या ट्रंप समर्थकों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त गंभीर हैं।
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सुरक्षा एजेंसियों ने कहा-राजनीति से प्रेरित जघन्य कृत्य
एफबीआई और सीक्रेट सर्विस ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि शुरुआती जांच से हत्या के पीछे राजनीतिक प्रेरणा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह एक जघन्य कृत्य है। जांच का दायरा बढ़ाकर कई राज्यों में संदिग्ध नेटवर्क्स की तलाश शुरू कर दी गई है। सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रंप के सार्वजनिक कार्यक्रमों की सुरक्षा को भी और कड़ा कर दिया है।
आसान नहीं था भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाना, इससे रिश्ते बिगड़े : ट्रंप
रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गलती का अहसास होने लगा है। ट्रंप ने कहा, ऐसा करना आसान नहीं था और इससे भारत के साथ रिश्तों में दरार आई है।
ट्रंप ने शुक्रवार को टीवी कार्यक्रम में कहा-देखिए, भारत रूस का सबसे बड़ा ग्राहक था। मैंने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया। ऐसा करना आसान नहीं था। यह बड़ी बात है और इससे भारत के साथ मतभेद पैदा हुए हैं। वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर शिकंजा कसने से क्या होगा।
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ट्रंप ने यह भी कहा, मैंने बहुत कुछ किया है। याद रखें कि यह हमारे से कहीं अधिक यूरोप की समस्या है। फिर दोहराया, मैंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध खत्म कराया। साथ ही, सात युद्ध खत्म कराने का दावा भी दोहराया। गौरतलब है कि भारत ने साफ किया कि वह रूस से तेल अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए खरीदता है। एजेंसी