फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र की जलवायु वार्ता में कहा कि उसे डर है कि उनके देश में चल रहे 'यलो वेस्ट मूवमेंट' का गलत फायदा अन्य देश उठा सकते हैं। ताकि ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ लड़ाई में वह अपनी महत्वाकांक्षाओं को कम कर सकें। ये आंदोलन सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने के खिलाफ चल रहा था।
31 हजार लोग जुड़े प्रदर्शन से
फ्रांस के आंकड़ों के मुताबिक 17 नवंबर से शुरू हुए आंदोलन से करीब 31 हजार लोग जुड़ चुके हैं। सरकार के खिलाफ नारे लगाने वाले इन लोगों ने न केवल रैलियां निकाली बल्कि कई वाहनों में भी आग लगाई है। लोगों ने सरकारी इमारतों को भी नुकसान पहुंचाया है। अभी तक 1700 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। अभियान शुरू पैरिस से हुआ था और अब पूरे फ्रांस में फैल चुका है। कहा जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों में करीब 8 हजार लोग तो पैरिस से ही हैं। इस प्रदर्शन का कोई नेता नहीं है। ये एक तरह का लीडरलेस यानी बिना नेता वाला आंदोलन है।
राष्ट्रपति मैक्रों के इस्तीफे की मांग
सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे 'यलो वेस्ट' प्रदर्शनकारियों का मुख्य नारा है, 'मैक्रों इस्तीफा दो'। लोगों का गुस्सा अपने उस नेता के लिए है जिसे वे सिर्फ 'अमीरों का नेता' मानते हैं। उनका मानना है कि मैक्रों आम जनता से दूर हैं। दरअसल, मैक्रों ने व्यापार सुधार के लिए कदम उठाए हैं और उनका मानना है कि इसका मकसद देश की अर्थव्यवस्था को अधिक वैश्विक बनाना है। वहीं, फ्रांस के कर्मचारियों की राय इसके ठीक उलट है। वे इसे 'बर्बर' और 'अधिकारों को कमजोर करने वाला' मानते हैं।
फ्रांस के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इकोलॉजिकल ट्रांसजिशन ब्रूने पोइरसन का कहना है, "इस पूरी हिंसा के लिए पर्यावरण को दोषी ठहराना खतरनाक होगा। यह एक बड़ी राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक समस्या है।" पोइरसन ने कहा, "जोखिम ये है कि बाकी देश... जो भी फ्रांस में हो रहा है उसे इस्तेमाल करेंगे और पारिस्थितिकीय संक्रमण के प्रश्न को कम करने की कोशिश करेंगे। हमारा आखिरी उद्देश्य होगा तेल पर निर्भरता कम करना।"
बता दें पोलैंड के कटोविस शहर में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन हो रहा है। जिसमें 200 देशों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया है। संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में हो रहे इस महासम्मेलन में 2015 की पैरिस डील पर विचार विमर्श हो रहा है। इस समझौते में कहा गया था कि दुनिया के सभी देश वैश्विक तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस तक कम करेंगे। वहीं संयुक्त राष्ट्र के एक्सपर्ट पैनल ने अक्तूबर में कहा था कि जीवाश्म ईंधन के उत्सर्जन को साल 2030 तक कम करना होगा। तभी सदी के अंत कर ये लक्ष्य हासिल हो पाएगा।
दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि फ्रांस में हो रहा प्रदर्शन उनके सही होने का सबूत है। ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए हुए पैरिस जलवायु समझौते से नाम वापस ले लिया था। ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, "शायद अब हास्यास्पद और अत्यधिक महंगी पैरिस डील को खत्म करने का वक्त आ गया है। ये लोगों का टैक्स कम करके पैसा वापस करने का वक्त है।"