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Cardiovascular Disease: बड़े पैमाने पर कार्डियोवासकुलर रोग से पीड़ित होने लगे हैं चीन के बच्चे, जानें इस बारे में सबकुछ

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, बीजिंग Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 18 Feb 2022 06:16 PM IST

सार

चीन के वयस्क लोगों में पक्षाघात और दिल का दौरा मृत्यु के सबसे बड़े कारण बन चुके हैं। इन दोनों समस्याओं की जड़ कार्डियोवासकुलर रोगों में होती है। पक्षाघात और दिल का दौरा पड़ने के कारण हर साल चीन में 40 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है।
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सांकेतिक फोटो। - फोटो : social media


इस अध्ययन के सिलसिले में 15,500 बच्चों और किशोरों से बातचीत की गई। इस सर्वे में शामिल व्यक्ति सात से 17 वर्ष तक उम्र के थे। उनमें से 1.9 फीसदी लड़कों और 1.7 फीसदी लड़कियों के बारे में यह जानकारी मिली कि उनमें कार्डियोवासकुलर रोग के लक्षण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकन हेल्थ एसोसिएशन ने कार्डियोवासकुलर हेल्थ के लिए जो सात पैमाने तय कर रखे हैं, उन सब पर इन बच्चों की सेहत ठीक नहीं पाई गई। ये पैमाने हैं- तंबाकू का सेवन, खराब भोजन, शारीरिक सक्रियता का अभाव, उच्च रक्तचाप, और रक्त में कॉलेस्ट्रॉल की ज्यादा मात्रा।


बीजिंग स्थित पिकिंग यूनिवर्सिटी और ग्वांगझाऊ स्थित सुन यात-सेन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने ये अध्ययन किया है। अध्ययनकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि चीन के बच्चों और किशोरों में ऐसे बहुत कम हैं, जिनकी हृदय संबंधी सेहत आदर्श स्थिति में हो। अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि जो चिंताजनक सूरत सामने आई है कि उसकी वजह शारीरिक सक्रियता का अभाव और खराब खान-पान है।


चीन के वयस्क लोगों में पक्षाघात और दिल का दौरा मृत्यु के सबसे बड़े कारण बन चुके हैं। इन दोनों समस्याओं की जड़ कार्डियोवासकुलर रोगों में होती है। पक्षाघात और दिल का दौरा पड़ने के कारण हर साल चीन में 40 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है। इन समस्याओं से पीड़ित होने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बुजुर्ग लोगों में ये बीमारियां आम हैं, लेकिन अब युवा लोग भी इनसे पीड़ित होने लगे हैं। विशेषज्ञों ने इसको लेकर चेतावनी दी है और इस बारे में समाज में जागरूकता लाने पर जोर दिया है।


ताजा अध्ययन में पाया गया कि चीन में बच्चे अक्सर व्यायाम नहीं करते। साथ ही उनका खान-पान भी सेहतमंद नहीं है। इसकी वजह से उनकी कार्डियोवासकुलर सेहत खतरे में पड़ रही है। सर्वे के दौरान पाया गया कि 30 प्रतिशत से भी कम छात्र जरूरी मात्रा में कसरत करते हैं। इसकी वजह से उनमें मोटापे की समस्या बढ़ रही है। पहले भी सरकार की तरफ से कराए गए अध्ययनों से ये बात सामने आई है कि चीन में मोटापा एक बड़ी समस्या बन गया है। इसे देखते हुए कुछ समय पहले चीन सरकार ने स्कूलों में खेल-कूद को अनिवार्य कर दिया।


ताजा अध्ययन से यह भी सामने आया है कि चीन के बच्चे सेंकडरी स्मोकिंग का अब अधिक शिकार हो रहे हैं। दूसरों के धूम्रपान करने से आसपास के लोगों के अंदर धुआं जाने को सेंकडरी स्मोकिंग कहा जाता है। वैसे सर्वे यह जरूर सामने आया कि पश्चिमी देशों की तुलना में अभी चीन में बहुत कम बच्चे खुद धूम्रपान करते हैं।

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