कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोमवार को कहा कि उनका देश 2026 की शुरुआत तक नाटो (NATO) के सैन्य खर्च के 2% जीडीपी वाले लक्ष्य को हासिल कर लेगा। पहले यह लक्ष्य दशक के अंत तक हासिल करने की योजना थी। कार्नी ने टोरंटो विश्वविद्यालय में दिए एक भाषण में कहा कि हमारा सैन्य ढांचा और उपकरण पुराने हो चुके हैं, जिससे हमारी तैयारियों में बाधा आ रही है। हमारी चार में से सिर्फ एक पनडुब्बी चालू हालत में है। हमारी नौसेना और जमीनी वाहन भी आधे से कम ही काम कर रहे हैं।
अमेरिका पर अधिक निर्भरता घटना पर जोर
पीएम कार्नी ने कनाडा के रक्षा उपकरणों के लिए अमेरिका पर अधिक निर्भरता को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कनाडा रक्षा उपकरणों के लिए अमेरिका पर बहुत अधिक निर्भर है, जिसे अब बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका पर अधिक निर्भरता घटाने के लिए हम अपनी रक्षा पूंजी का तीन-चौथाई हिस्सा जो अमेरिका को भेजते हैं, अब नहीं भेजा जाएगा।
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अमेरिका के कमजोरी पर जोर
कार्नी ने आगे कहा कि शीत युद्ध के बाद अमेरिका दुनिया का प्रमुख ताकतवर देश रहा, लेकिन अब उसका वर्चस्व कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका अपने बाजारों तक पहुंच और सुरक्षा का शुल्क वसूल रहा है। ऐसे में हम अपनी जिम्मेदारी खुद निभाएंगे।
अमेरिका को आंख दिखा यूरोपीय संघ से नजदीकी
बता दें कि ट्रंप के साथ टैरिफ विवाद के बाद से कार्नी अमेरिके की नीतियों के खिलाफ सख्ती से पेश होते नजर आ रहें हैं। जहां अब कार्नी सरकार अब यूरोपीय संघ के साथ साझेदारी बढ़ा रही है ताकि अमेरिका पर सुरक्षा निर्भरता कम की जा सके। इसमें पनडुब्बियों, जहाजों, हथियारों, ड्रोन, रडार और आर्कटिक निगरानी तकनीक की खरीद शामिल है। साथ ही, अमेरिका से F-35 फाइटर जेट खरीद की समीक्षा भी हो रही है।
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नया खतरा, पीएम कार्नी की चेतावनी
वहीं अंत में प्रधानमंत्री कार्नी ने चेतावनी दी कि आज एक नया साम्राज्यवाद हमारे सामने है। अगर हम टेबल पर नहीं होंगे, तो मेन्यू में होंगे। उन्होंने कहा कि कनाडा को अब अपनी भौगोलिक स्थिति पर भरोसा करके सुरक्षित महसूस करना बंद करना चाहिए।
इसके साथ ही कार्नी ने यह भी कहा कि रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद यूरोप और कनाडा दोनों ने अपने रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की है और अब सुरक्षा को लेकर एकजुट होकर काम करना जरूरी है।