ब्रिटेन में करीब 90 फीसदी लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज मिल चुकी है।
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ब्रिटेन के बड़े डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा से जुडे़ अधिकारियों ने सरकार चेतावनी दी है कि अगर गरीब देशों को कोरोना वैक्सीन नहीं भेजी जाती, तो वो भी बूस्टर डोज नहीं लगवाएंगे। दरअसल, कुछ देशों ने कोरोना वैक्सीन की दो डोजों के बाद वायरस से लड़ाई में घटती प्रतिरोधक क्षमता के चलते एक तीसरी डोज लगाने का भी फैसला किया है। इनमें इजराइल, चेक गणराज्य, जर्मनी और फ्रांस सबसे आगे रहे हैं। हालांकि, अमेरिका और ब्रिटेन समेत कुछ देश अभी इस पर नियम बनाने में जुटे हैं। अब स्वास्थ्यकर्मियों के विरोध के बाद ब्रिटिश सरकार की राह मुश्किल होने वाली है।
क्यों हो रहा है ब्रिटेन में तीसरी डोज का विरोध?
हाल ही में एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि दुनिया की 73 फीसदी कोरोना वैक्सीन डोज 10 देशों में ही दी गई हैं, जबकि गरीब देशों की 10 फीसदी जनता को अब तक सिर्फ एक ही डोज मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि अमीर देशों की तरफ से वैक्सीन जुटाए जाने की वजह से दुनिया में 58 फीसदी लोगों को पहली डोज लगना भी बाकी है। जहां संयुक्त अरब अमीरात में 79 फीसदी लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, वहीं तंजानिया, चाड और हैती जैसे देशों में सिर्फ एक फीसदी आबादी को ही कोरोना वैक्सीन लगी है।
क्या बोले ब्रिटिश विशेषज्ञ? -
ब्रिटेन के स्वास्थ्य सेवाओं के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उनके लिए बूस्टर डोज लेना अनिवार्य किया जाता है, तो वे इसका सख्त विरोध करेंगे। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जैक डनिंग ने यहां तक कहा कि दो वैक्सीन डोज पा चुके लोगों को तीसरी डोज देना बिल्कुल वैसा ही होगा जैसे कि पानी में उतरे व्यक्ति को एक और लाइफ जैकेट देना, जबकि जिनके पास वैक्सीन डोज नहीं है, उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज करना।
इंग्लैंड के पब्लिक हेल्थ सर्विस के तकनीकी विभाग के अध्यक्ष पोरिया हाजीबघेरी ने कहा कि वे भी कोरोना वैक्सीन की तीसरी डोज नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में करीब 4 करोड़ 85 लाख (89.4 फीसदी) लोगों को कोरोना वैक्सीन की एक डोज मिल चुकी है, वहीं 4 करोड़ 44 लाख को दोनों डोज मिली हैं। ऐसे में तीसरी डोज उन लोगों को भिजवाई जानी चाहिए, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
जॉइंट कमीशन ऑन वैक्सीनेशन एंड इम्युनाइजेशन के अध्यक्ष सर एंड्रयू पोलार्ड ने कहा कि उन्हें भी एक और डोज दिए जाने का कोई औचित्य नहीं समझ आता। उन्होंने कहा कि अगर वैक्सीन लगने के बाद कोरोना के केस बढ़ते हैं, तो यह अचानक नहीं होगा और ब्रिटेन का निगरानी तंत्र ऐसे मामलों को तुरंत पकड़ लेगा।