ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (फाइल फोटो)
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साल 2020 के शुरुआती तीन महीने में यानी मार्च अंत तक ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में दो फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। साल 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के बाद किसी तिमाही में यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। ब्रिटेन की जीडीपी की यह स्थिति बताती है कि कोरोना का यहां की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अकेले मार्च में 5.8 फीसदी की गिरावट आई। यह अब तक की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (ओएनएस) ने बुधवार को इस संबंध में आधिकारिक आंकड़े जारी किए। ओएनएस ने कहा, अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस का असर साफ दिखता है। मार्च में समाप्त तिमाही में लगभग सभी उप-क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई। साल 2019 की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में ब्रिटेन की आर्थिक वृद्धि दर शून्य रही थी, क्योंकि ब्रिटेन के सेवाक्षेत्र में रिकॉर्ड गिरावट देखी गयी थी।
ओएनएस के आंकड़ों के मुताबिक समीक्षावधि में देश के सेवा क्षेत्र में 1.9 फीसदी की गिरावट देखी गई है जो कुल जीडीपी का करीब 80 फीसदी है। इस दौरान उत्पादन में 2.1 फीसदी और निर्माण में 2.6 फीसदी की गिरावट रही। यह आंकड़े मंदी के रूख को दिखाते हैं, यदि दो तिमाहियों में लगातार यह गिरावट रहती है तो देश की अर्थव्यवस्था में मंदी होगी।
यह आंकड़े ब्रिटेन के भारतीय मूल के वित्त मंत्री ऋषि सुनक की कोरोना वायरस नौकरी संरक्षण योजना को अक्तूबर तक बढ़ाए जाने की घोषणा के एक दिन बाद आए हैं। इसके तहत कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा जा सकता है और सरकार इसके लिए अनुदान देगी। सुनक इंफोसिस के संस्थापक एन नारायण मूर्ति के दामाद हैं।