ब्राजील की सरकार ने सोमवार को एक बयान जारी कर माना कि पूर्व राष्ट्रपति जेर बोल्सोनारो के कार्यकाल में पेराग्वे की सरकार की जासूसी की गई। बयान में ये भी कहा गया कि मौजूदा राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा के सत्ता संभालने के कुछ समय बाद ही इसे रोक दिया गया था। दरअसल एक न्यूज वेबसाइट ने कथित तौर पर दावा किया कि ब्राजील की लूला दा सिल्वा सरकार पेराग्वे की जासूसी करा रही है। इसके बाद ही ब्राजील की सरकार ने बयान जारी कर सफाई दी है।
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ब्राजील के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर दी सफाई
ब्राजील के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को जारी बयान में बताया कि 'राष्ट्रपति लूला का प्रशासन पेराग्वे की जासूसी के आरोपों से साफ इनकार करता है। पेराग्वे, ब्राजील के साथ मरकोसर व्यापार समूह का हिस्सा हैं और ऐतिहासिक तौर पर दोनों देशों के करीबी संबंध रहे हैं।' विदेश मंत्रालय ने कहा कि जासूसी पूर्व राष्ट्रपति जेर बोल्सोनारो के कार्यकाल में कराई जा रही थी और जैसे ही राष्ट्रपति लूला को इसके बारे में जानकारी हुई, तो उन्होंने सत्ता संभालने के तीन महीने के भीतर ही इसे बंद करा दिया था।
पेराग्वे की सरकार ने आरोपों पर कही ये बात
वहीं ब्राजील सरकार के बयान पर पेराग्वे के विदेश मंत्री ने कहा कि ब्राजील द्वारा हमारे सिस्टम में घुसपैठ के कोई सबूत नहीं हैं। इस मामले पर पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो ने भी अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्राजील की खुफिया एजेंसी ने पेराग्वे के कंप्यूटर सिस्टम में सेंधमारी कर इताइपु हाइड्रोलिक बांध को लेकर टैरिफ बातचीत संबंधी जानकारी जुटाई थी। यह दुनिया के सबसे बड़े बांधों में से एक है। इताइपु बांध से की क्षमता 14 हजार मेगावाट बिजली बनाने की है और इस बांध से बनने वाली अधिकतर बिजली पेराग्वे की सरकार से ब्राजील ही खरीदता है। हाल के वर्षों में इसे लेकर ब्राजील और पेराग्वे में तनाव बढ़ा है। जेर बोल्सोनारो के खिलाफ अभी भी ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट में पांच मामले लंबित हैं। इनमें से एक साल 2022 के चुनाव में बगावत की साजिश रचने से जुड़ा है।