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ब्रह्मोस से भारत की रक्षा ताकत को नई उड़ान: 600 मिलियन डॉलर पार होगा निर्यात, इंडोनेशिया-वियतनाम भी खरीदेंगे

Thu, 01 Oct 2026 06:30 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्जूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ब्रह्मोस मिसाइल भारत की बढ़ती रक्षा निर्यात क्षमता का बड़ा उदाहरण बन रही है। रक्षा सचिव के मुताबिक इसका निर्यात 600 मिलियन डॉलर से ज्यादा पहुंचने वाला है और फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया व वियतनाम तक इसकी पहुंच बनेगी। ब्रह्मोस की खासियत क्या है? सुखोई से दागे जाने वाले इसके संस्करण की क्या भूमिका है? भारत का कुल रक्षा निर्यात कितनी तेजी से बढ़ा और इसमें निजी क्षेत्र का कितना योगदान है?
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ब्रह्मोस से भारत का रक्षा निर्यात मजबूत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत की रक्षा ताकत अब सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि दुनिया के कई देशों तक पहुंच रही है। इसी कड़ी में ब्रह्मोस मिसाइल भारत की उभरती रक्षा निर्यात कहानी का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा है कि ब्रह्मोस का निर्यात 600 मिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करने वाला है। भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया के तीन देशों को इस रणनीतिक मिसाइल प्रणाली की बिक्री के लिए करार या समझौते किए हैं।
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ब्रह्मोस का निर्यात 600 मिलियन डॉलर के पार कैसे पहुंचेगा?
रक्षा सचिव ने बताया कि फिलीपींस को करीब 330 मिलियन डॉलर की ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति की जा चुकी है। इसके अलावा इंडोनेशिया और वियतनाम के लिए भी निर्यात की दिशा में समझौते या करार हुए हैं। उनके मुताबिक वियतनाम के लिए शुरुआती निर्यात करीब 100 मिलियन डॉलर और इंडोनेशिया के लिए करीब 200 मिलियन डॉलर का हो सकता है। इन सौदों के साथ ब्रह्मोस का कुल निर्यात 600 मिलियन डॉलर से ज्यादा पहुंचने की उम्मीद है। रक्षा सचिव ने इसे भारत की उभरती रक्षा निर्यात क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

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किन तीन देशों तक पहुंच रही है ब्रह्मोस?
भारत की ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली दक्षिण-पूर्व एशिया के तीन देशों तक पहुंच रही है। इनमें फिलीपींस के साथ इंडोनेशिया और वियतनाम शामिल हैं। रक्षा सचिव के मुताबिक, फिलीपींस को करीब 330 मिलियन डॉलर की प्रणाली दी जा चुकी है, जबकि इंडोनेशिया और वियतनाम के लिए करीब 200 मिलियन डॉलर और 100 मिलियन डॉलर के शुरुआती निर्यात का अनुमान है। इस तरह ब्रह्मोस भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को विदेशी बाजारों में पहुंचाने वाली प्रमुख प्रणालियों में शामिल हो गई है।

ब्रह्मोस में ऐसी क्या खासियत है?
ब्रह्मोस मिसाइल में पारंपरिक वारहेड के साथ आधुनिक गाइडेड प्रणाली है। यह लंबी दूरी तक सुपरसोनिक गति से लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम है। इसकी तेज रफ्तार, सटीकता और मारक क्षमता इसे एक उच्च क्षमता वाली मिसाइल प्रणाली बनाती है। इसका एयर-लॉन्च संस्करण भी मौजूद है, जिसे सुखोई लड़ाकू विमानों से इस्तेमाल किया जा सकता है। रक्षा सचिव ने बताया कि इस एयर-लॉन्च संस्करण ने सुखोई विमानों पर अच्छी सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस में निर्यात के लिहाज से अभी काफी संभावनाएं हैं।

ऑपरेशन सिंदूर से ब्रह्मोस को क्या पहचान मिली?
रक्षा सचिव ने कहा कि ब्रह्मोस प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्ध में अपनी क्षमता साबित की। उन्होंने इसे भारत की उभरती रक्षा निर्यात कहानी का एक बेंचमार्क बताया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी पहले ब्रह्मोस को केवल एक मिसाइल नहीं, बल्कि देश की बढ़ती स्वदेशी क्षमता का प्रतीक बता चुके हैं। ब्रह्मोस की स्वदेशी क्षमता और युद्ध में इसके इस्तेमाल से जुड़ी सफलता को भारत के रक्षा उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत का रक्षा निर्यात कितना बढ़ा है?
भारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 38424 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष के 23,622 करोड़ रुपये के मुकाबले 14,802 करोड़ रुपये यानी 62.66 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। भारतीय रक्षा उपकरण अब 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहे हैं। रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों यानी डीपीएसयू और निजी क्षेत्र दोनों ने इसमें योगदान दिया है। डीपीएसयू की हिस्सेदारी 54.84 प्रतिशत और निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 45.16 प्रतिशत रही।
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निजी कंपनियों और डीपीएसयू का कितना योगदान रहा?
रक्षा निर्यात में निजी क्षेत्र और सरकारी रक्षा कंपनियों की भूमिका भी बढ़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में डीपीएसयू ने 21,071 करोड़ रुपये और निजी कंपनियों ने 17,353 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादों का निर्यात किया। पिछले वित्त वर्ष में डीपीएसयू का निर्यात 8,389 करोड़ रुपये और निजी क्षेत्र का निर्यात 15,233 करोड़ रुपये था। डीपीएसयू के निर्यात में एक साल में 151 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि निजी क्षेत्र के निर्यात में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ये आंकड़े बताते हैं कि भारतीय रक्षा उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ रही है और भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में अपनी जगह मजबूत कर रही हैं।
 
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