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अमेरिका: बेरोजगारी और नौकरियों के अवसर ज्यादा, खाली जगहों को भरने के लिए कोई होड़ नहीं

Thu, 01 Jul 2021 01:07 PM IST
‌डिंपल अलावाधी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

महामारी के दौरान अमेरिकी सरकार ने बेरोजगारी बीमा योजना का विस्तार किया। जानकारों का कहना है कि इस वजह से बेरोजगार लोगों को नौकरी की तलाश के समय सौदेबाजी करने या अच्छी नौकरी मिलने तक इंतजार करने का मौका मिल गया है। 
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अमेरिका में बेरोजगारी और नौकरियों के अवसर ज्यादा - फोटो : istock
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विस्तार
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इस वक्त अमेरिका में एक करोड़ लोग बेरोजगार हैं, जबकि 90 लाख नौकरियों की जगहें खाली हैं। लेकिन उन खाली जगहों को भरने के लिए बेरोजगार लोगों के बीच कोई होड़ नहीं लगी है। विश्लेषकों के मुताबिक दशकों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब अमेरिका में बेरोजगार लोग खुद को अपनी पसंद की नौकरी चुनने की स्थिति में पा रहे हैं।

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नौकरी संबंधी सूचनाएं देने वाली एक वेबसाइट के एक ताजा सर्वे के मुताबिक नौकरी ढूंढ रहे लोगों के बीच सिर्फ 10 फीसदी ने कहा कि वे तुरंत नौकरी ज्वाइन करने की तलाश में हैं। इनडीड हायरिंग लैब नाम की इस वेबसाइट के मुताबिक 45 फीसदी बेरोजगार लोग तसल्ली से नौकरी ढूंढने के मूड में हैं। 30 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो अभी नौकरी नहीं ढूंढ रहे हैं, हालांकि भविष्य में वे नौकरी करना चाहते हैँ।

विश्लेषकों के मुताबिक अभी बाजार में ज्यादा नौकरियां ऐसी उपलब्ध हैं, जिन्हें लॉ-वेज यानी कम तनख्वाह वाली माना जाता है। ये नौकरियां सर्विस सेक्टर में हैं। इस सेक्टर की महामारी के बाद तेजी से रिकवरी हुई है। इसलिए यहां कर्मचारियों की तुरंत जरूरत है। लेकिन उन्हें कर्मचारी ढूंढने में दिक्कत पेश आ रही है। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्री स्टीवन फेजारी ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- 'अभी उपलब्ध नौकरियां बहुत अच्छी क्वालिटी की नहीं हैँ। वे कड़ी मेहनत वाली नौकरियां हैं, जिनमें बहुत अच्छी सैलरी नहीं मिलती।'
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गौरतलब है कि महामारी के दौरान अमेरिकी सरकार ने बेरोजगारी बीमा योजना का विस्तार किया। जानकारों का कहना है कि इस वजह से बेरोजगार लोगों को नौकरी की तलाश के समय सौदेबाजी करने या अच्छी नौकरी मिलने तक इंतजार करने का मौका मिल गया है। फेजारी ने कहा- 'ये लोग अभी संभवतः बिना नौकरी किए अपना किराया चुकाने या अपने बिल भरने की स्थिति में हैं। इसलिए बेहतर वेतन या सुविधाओं के लिए अभी वे इंतजार कर रहे हैं।'

वेबसाइट इनडीड हायरिंग लैब के मुताबिक बिना कॉलेज डिग्री वाले कर्मी नौकरी टालने के लिए कई कारण बता रहे हैँ। उनमें 25 फीसदी ऐसे हैं, जो कोविड-19 वायरस के संक्रमण से भयभीत हैँ। वे दोबारा काम पर जाने के पहले टीकाकरण की दर बढ़ने का इंतजार कर रहे हैँ। 20 फीसदी से अधिक कर्मी अभी इसलिए नौकरी नहीं करना चाहते, क्योंकि उनके पास जरूरी वित्तीय संसाधन मौजूद है। 12 फीसदी कर्मियों ने कहा कि बेरोजगारी बीमा मौजूद रहने के कारण वे नौकरी टाल रहे हैँ। इसके अलावा घर पर बच्चों की देखभाल भी एक कारण है, जिस वजह से कर्मी अपनी काम पर लौटने से मना कर रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि ये मौका अमेरिका में श्रमिकों के नजरिए से एक टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है। इस वक्त कर्मियों की मांग ज्यादा है। इसलिए कंपनियां अभी ज्यादा वेतन और भत्ते ऑफर करने के लिए मजबूर दिख रही हैं। लेकिन वेबसाइट इनडीड हायरिंग लैब से जुड़े अर्थशास्त्री निक बंकर ने कहा है कि अभी भले श्रमिक लाभ की स्थिति में दिख रहे हों, लेकिन इस बात में शक है कि यह श्रमिकों की सौदेबाजी की शक्ति के लिहाज अभी किसी नए युग की शुरुआत का संकेत है। उन्होंने कहा कि इस साल की सर्दियां आते-आते ऐसे हालात बन सकते हैं, जब श्रमिक नौकरी ढूंढने के लिए मजबूर हो जाएं। तब ज्यादा वेतन और भत्तों की मांग वे नहीं कर पाएंगे।

गौरतलब है कि कई राज्यों में महामारी से जुड़े बेरोजगारी बीमा और अन्य लाभों को खत्म किया जाने लगा है। जेफरीज नाम की एक फर्म के विश्लेषण से जाहिर हुआ है कि जिन राज्यों में बेरोजगारी बीमा योजना अब नहीं है, वहां बेरोजगार लोग अब सौदेबाजी की स्थिति में नहीं हैं।

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