बोइंग ने मंगलवार को कहा है कि पहली तिमाही में उसके पास विमानों के ऑर्डर आधे हो गए हैं। दो बड़े विमान हादसों के बाद कंपनी के सबसे ज्यादा बिकने वाले विमान 737 मैक्स की सेवाएं दुनियाभर में बंद हैं।
जहां बीते साल पहली तिमाही में 180 विमानों की डिमांड थी, वहीं अब ये संख्या 95 पर आ गई है। मार्च में कंपनी को एक भी नया ऑर्डर नहीं मिला है। बोइंग अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। जहां फरवरी में 26 मैक्स की डिलीवरी हुई, वहीं मार्च में केवल 11 मैक्स की डिलीवरी हो पाई है।
बोइंग की डिलीवरी इथोपिया विमान हादसे के बाद से प्रभावित हुई थी। इथोपियन एयरलाइन का बोइंग विमान 10 मार्च, 2019 को क्रैश हो गया था, जिससे विमान में सवार सभी 157 लोगों की मौत हो गई।
737 मैक्स बोइंग का सबसे नया मॉडल है। इस विमान से हुए हादसों का मुख्य कारण कंपनी द्वारा इसे विकसित करने में की गई जल्दबाजी है। एक विदेशी अखबार के मुताबिक दो विमान निर्माता कंपनियों बोइंग और एयरबस के बीच भारी प्रतिस्पर्धा चल रही थी। बोइंग 737 मैक्स का विकास प्रतिस्पर्धा के दबाव में बेहद जल्दबाजी में किया गया था।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार साल 2011 में बोइंग के सबसे बड़े ग्राहक अमेरिकन एयरलाइंस ने उसके प्रतिद्वंद्वी एयरबस को सैकड़ों नए फ्यूल एफिशिएंट विमानों का ऑर्डर देने की तैयारी की थी। इससे बोइंग को बड़ा झटका लगा।
अमेरिकन एयरलाइंस के चीफ एग्जिक्युटिव गेरार्ड आर्पे ने बोइंग के वरिष्ठ अधिकारी डब्ल्यू जेम्स मैकनेर्ने से कहा कि अगर बोइंग कारोबार करना चाहता है तो उसे आक्रामक होकर आगे बढ़ना होगा। लेकिन बाद में बोइंग ने अमेरिकन एयरलाइन को मना लिया। वहीं एक नए पैसेंजर प्लेन को विकसित करने का विचार भी त्याग दिया। जिसे विकसित होने में एक दशक का समय लगता। इसके अलावा एयरलाइन ने बोइंग को 737 मैक्स को अपडेट करने को कहा। जिसके करीब छह माह बाद 737 मैक्स विमान अस्तित्व में आया।
एफएए के तकनीकी विशेषज्ञों ने विदेशी अखबार को बताया कि 737 मैक्स की एजेंसी के प्रमाणन के लिए प्रबंधकों ने उन्हें प्रक्रिया को तेज करने के लिए कहा था। इसके पीछे का कारण था कि मैक्स विमान का विकास अपने प्रतिद्वंद्वी विमान एयरबस के ए32निओ से नौ महीने पीछे था।
आपके लिए- 737 मैक्स 8 बोइंग कंपनी का सबसे नया मॉडल है। इसकी दुनियाभर में बड़ी मांग थी। लेकिन प्रतिस्पर्धा के कारण विमान को जल्दबाजी में विकसित किया गया। विमान से दो बड़ी दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 346 लोगों की मौत हो गई। जांच में पता चला कि इसके सॉफ्टवेयर में खराबी थी। अब पूरी दुनिया में इस विमान की सेवाएं बंद हैं और कंपनी को ऑर्डर मिलने भी बंद हो गए हैं।