विश्लेषकों की राय बनी है कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की चीन के विदेश मंत्री चिन गांग से हुई बातचीत का नतीजा सकारात्मक रहा। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि इस यात्रा को लेकर बहुत कम उम्मीद जोड़ी गई थी। इससे संबंधों में सुधार कोई आशा नहीं थी। इसलिए दोनों देशों के बातचीत जारी रखने के फैसले को सही दिशा में माना गया है।
रविवार को ब्लिंकन और चिन के बीच पांच घंटों से भी ज्यादा समय तक बातचीत हुई। इस दौरान ब्लिंकन ने चिन को अमेरिका आने का आमंत्रण दिया। बातचीत के बाद जारी दोनों देशों की अलग-अलग विज्ञप्तियों में इस बात का जिक्र किया गया कि चिन ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया है और दोनों देशों की सुविधा के मुताबिक समय पर वे वॉशिंगटन जाएंगे।
विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि बातचीत के बाद अमेरिका की तरफ से जहां संक्षिप्त विज्ञप्ति जारी की गई, वहीं चीन का बयान अपेक्षाकृत लंबा था। अमेरिकी बयान में सिर्फ यह कहा गया कि चीन से संबंधित अपनी चिंता ब्लिंकन ने चीनी विदेश मंत्री को बताई। जबकि चीनी बयान में उन मुद्दों का उल्लेख किया गया, जिन्हें चिन ने अमेरिकी विदेश मंत्री के सामने रखा। इसमें सबसे प्रमुख ताइवान का मसला है। चीनी बयान के मुताबिक विदेश मंत्री चिन ने यह स्पष्ट कर दिया कि ताइवान चीन की नजर में मुख्य मुद्दा है और इस पर वह किसी प्रकार की नरमी नहीं दिखाएगा।
चीनी बयान के मुताबिक वार्ता के दौरान चिन ने यह साफ कहा कि 1970 के दशक में दोबारा रिश्ता बनने के बाद से अमेरिका और चीन के संबंध इस समय सबसे खराब दौर में हैं। दोनों देशों के बयानों में कहा कि दोनों पक्षों के बीच ‘दो टूक, ठोस और रचनात्मक’ बातचीत हुई। विश्लेषकों ने रचनात्मक शब्द के इस्तेमाल को महत्त्वपूर्ण माना है। दो टूक वार्ता की बात से उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला है कि दोनों पक्षों ने बेलाग ढंग से एक-दूसरे को लेकर अपनी शिकायत बताई।
ब्लिंकन ने इस कूटनीति के महत्त्व पर जोर दिया और कहा कि सभी मुद्दों पर संवाद बनाए रखना चाहिए, ताकि गलतफहमी पैदा होने के जोखिम से बचा जा सके। वॉशिंगटन से चीन के लिए रवाना होने से पहले ब्लिंकन ने कहा था कि उनकी यात्रा का मकसद चीन से पेश आ रही चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए ‘गहन कूटनीति’ का रास्ता अख्तियार करना है। समझा जाता है कि विदेश मंत्री चिन और अन्य चीनी अधिकारियों के साथ बातचीत शुरू कर ब्लिंकेन ने इस कूटनीति की शुरुआत की है।
कूटनीति विशेषज्ञों ने इस यात्रा को इसलिए भी महत्त्वपूर्ण माना है कि बीते पांच साल से कोई अमेरिकी विदेश मंत्री चीन नहीं गया था। इसके पहले 2018 में तत्कालीन विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने चीन की यात्रा की थी। उनकी उस यात्रा के कुछ समय बाद ही तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध की शुरुआत कर दी। 2021 में जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद भी चीन के साथ अमेरिकी रिश्तों में तनाव बढ़ता गया है।
ब्लिंकेन ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से की मुलाकात
एंटनी ब्लिंकन ने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, सीसीपी के केंद्रीय विदेश मामलों के कार्यालय के निदेशक वांग यी और स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री चिन गांग से मुलाकात की। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों की एक श्रृंखला में प्रमुख प्राथमिकताओं पर स्पष्ट, ठोस और रचनात्मक चर्चा की। उन्होंने बताया कि ब्लिंकन ने गलत गणना के जोखिम को कम करने के लिए मुद्दों की पूरी श्रृंखला में संचार के खुले चैनल बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हम मजबूती से प्रतिस्पर्धा करेंगे, तो अमेरिका उस प्रतियोगिता का जिम्मेदारी से प्रबंधन करेगा ताकि संबंधों में टकराव न हो। मैथ्यू ने बताया कि ब्लिकंन ने जोर देकर कहा कि अमेरिका चिंता के क्षेत्रों के साथ-साथ संभावित सहयोग के उन क्षेत्रों को उठाने के लिए कूटनीति का इस्तेमाल करना जारी रखेगा जहां हमारे हित की बात हो।