ब्लैक होल की पहली वास्तविक तस्वीर
ब्लैक होल हमेशा से उत्सुकता का विषय रहा है। हर वैज्ञानिक और शोधकर्ता जानना चाहते थे कि आखिर ब्लैक होल दिखता कैसा है, जहां जाने के बाद कोई भी चीज हमेशा के लिए आखों से ओझल हो जाती है। आखिरकार इस सवाल का जवाब मिल गया है। खगोलविज्ञानियों ने बुधवार को ब्लैक होल की पहली तस्वीर जारी की। इसे देखकर ऐसा लगता है मानो एक राक्षस पूरे ब्रह्मांड में बिखरे हुए सितारों को निगल रहा हो और गुरुत्वाकर्षण के अभेद्य कवच से बिलकुल काला है जहां कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा।
व्हाइट-हॉट गैस और प्लाज्मा के फ्लेम-ऑरेंज आभामंडल से घिरे एक गहरे काले केंद्र की छवि पिछले 30 सालों में कलाकारों की किसी बनाई गई कलाकृति जैसी ही दिखती है। लेकिन इस बार यह असली तस्वीर है।
18वीं सदी के बाद से ही वैज्ञानिक अदृश्य "काले तारे" पर चर्चा कर रहे हैं और उसके बारे में जानने चाह रहे हैं। लेकिन किसी दूरबीन की मदद से इसे जानने की दिशा में कोई काम नहीं किया गया। यहां तक की इसकी बहुत कम तस्वीरें खींचीं गईं हैं।
सुपरमैसिव ब्लैक होल अब रेडियो दूरबीनों के दूर-दराज तक फैले नेटवर्क द्वारा अमर हो गया है। यह एम87 नामक आकाशगंगा में मौजूद है जो 5 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर है।
ब्लैक होल की तस्वीर इवेंट हॉरिजन टेलिस्कोप द्वारा ली गई होगी। इवेंट हॉरिजन टेलिस्कोप को दुनिया भर के छह जगहों पर लगाया गया। इस टेलिस्कोप को खास तौर पर ब्लैक होल की तस्वीर लेने की लिए ही बनाया गया है।
बता दें कि ये 6 टेलिस्कोप हवाई, एरिजोना, स्पेन, मेक्सिको, चिली और दक्षिणी ध्रुव में लगाए गए हैं। इन टेलिस्कोप्स को जोड़कर एक बड़ा आभासी टेलिस्कॉप बनाया गया। इन टेलिस्कोप्स से मिले डाटा को सुपरकंप्यूटर में स्टोर किया जाएगा।
क्या होता है ब्लैक होल
ब्लैक होल अंतरिक्ष में वह जगह है जहां भौतिक विज्ञान का कोई नियम काम नहीं करता। इसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र बहुत शक्तिशाली होता है। इसके खिंचाव से कुछ भी नहीं बच सकता। प्रकाश भी यहां प्रवेश करने के बाद बाहर नहीं निकल पाता है। यह अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है। ब्लैक होल के चारों ओर एक सीमा होती है। उस सीमा को घटना क्षितिज कहा जाता है। उसमें वस्तुएं गिर तो सकती है लेकिन वापस नहीं आ सकती। इसलिए इसे ब्लैक होल कहा जाता है।