अमेरिका मीडिया में ब्रेक हुई एक खबर के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कुछ रोज पहले व्हाइट हाउस में इतिहासकारों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने इस बारे में इतिहासकारों की राय पूछी कि एतिहासिक प्रभाव छोड़ने के लिए उनको क्या बड़े कदम उठाने चाहिए। मीडिया में छपी रिपोर्टों में कयास लगाया गया है कि बाइडन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलीन डी रूजवेल्ट (एफडीआर) जैसी विरासत बनाना चाहते हैं। एफडीआर 1930 के दशक में राष्ट्रपति बने थे, जब अमेरिका महामंदी से जूझ रहा था। एफडीआर ने महामंदी से निकाल कर देश में आधुनिक ढांचा तैयार करने के लिए 'न्यू डील' नाम से बहुचर्चित कानून बनाए थे।
बताया जाता है कि व्हाइट हाउस की बैठक में शामिल हुए इतिहासकारों ने राय जताई कि ये वक्त बड़े कदम उठाने का है। अगर इसे सीनेट में पास कराने में दिक्कत हो, तो राष्ट्रपति को वहां फिलिबस्टर नियम खत्म कराने की दिशा में पहल करनी चाहिए। फिलिबस्टर नियम के तहत कोई अहम बिल पास कराने के लिए 100 सदस्यीय सदन में 60 सदस्यों के वोट की जरूरत होती है। सामान्य स्थितियों में बिल सिर्फ 51 वोट से पास कराए जा सकते हैं। बाइडन की डेमोक्रेटिक पार्टी के पास फिलहाल इतने वोट मौजूद हैं।
विश्लेषकों ने कहा है कि अभी चार ऐसे पहलू हैं, जिनकी वजह से बाइडन बड़े कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं। इनमें पहली बात तो यह है कि कांग्रेस (अमेरिकी संसद) में डेमोक्रेटिक पार्टी के ऊपर फिलहाल उनका पूरा नियंत्रण है। दूसरा पहलू पार्टी का प्रोग्रेसिव धड़ा है, जो लगातार बड़े प्रगतिशील कदम उठाने के लिए दबाव बनाए हुए है। इसके अलावा आर्थिक परिस्थितियां ऐसी हैं, जिनमें समझा जा रहा है कि साधारण कदमों से काम नहीं चलेगा। और फिर बाइडन के पक्ष में अगली बात यह है कि देश में उनकी लोकप्रियता का स्तर ऊंचा बना हुआ है।
वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपतियों का इतिहास लिखने वाले माइकल बेसलस ने कहा कि बाइडेन पिछली सदी के दो राष्ट्रपतियों एफडीआर और लिंडन बी जॉनसन से सीख ले सकते हैं। उन दोनों ने बहुत छोटी अवधि में दीर्घकालिक बदलाव वाले कदम उठाए थे। खासकर एफडीआर ने 1933 में जो न्यू डील लागू की थी, उससे देश को महामंदी से बचाया जा सका था।
व्हाइट हाउस के सूत्रों के हवाले से मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक बाइडन आने वाले दिनों में बड़ी योजनाएं घोषित करेंगे। उनसे संबंधित बिल पास कराने के लिए अगर फिलिबस्टर नियम को खत्म या संशोधित कराने की जरूरत महसूस हुई, तो वे इससे भी नहीं हिचकेंगे। सूत्रों ने कहा है कि बाइडेन इस बात से उत्साहित हैं कि अमेरिकी मीडिया में उन्हें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से अधिक साहसी और बड़ी सोच वाला बताया जा रहा है।
बाइडन के अगले इरादों की भनक रिपब्लिकन पार्टी को भी है। सीनेट में पार्टी के नेता मिच मैकॉनल कुछ रोज पहले कहा कि अगर बाइडेन ने फिलिबस्टर नियम को खत्म कराया, तो उससे दोनों पार्टियों के बीच कभी ना भरी जा सकने वाली ऐसी खाई पैदा हो जाएगी।
राष्ट्रपति बनने के बाद बाइडन ने 1.9 ट्रिलियन का विशाल कोरना राहत पैकेज पास कराया। इससे उनके इरादे को लेकर जनता में भरोसा पुख्ता हुआ है। रिपब्लिकन पार्टी के एक भी सीनेटर ने इस पैकेज का समर्थन नहीं किया। इसके बावूजद बाइडन इसे पास कराने पर अडिग रहे। उप राष्ट्रपति कमला हैरिस के निर्णायक वोट से इसे पारित कराया गया।
अब बाइडन का अगला एजेंडा लगभग तीन ट्रिलियन डॉलर का इन्फ्रास्ट्रक्चर और फैमिली रिलीफ पैकेज को मंजूरी दिलाना है। इस पैकेज के तहत ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड बिछाना शामिल है। इसके अलावा बच्चों को कोरोना पैकेज में दी गई वित्तीय मदद को स्थायी बनाना, जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए महत्वाकांक्षी बिल पास कराना, बंदूक रखने के अधिकार के सीमित करना, और मताधिकार को विस्तृत करना बाइडेन के अगले एजेंडे में शामिल है।