केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव
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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को मिस्र के शर्म अल-शेख में आयोजित यूएन जलवायु कांफ्रेंस (कॉप-27) में जलवायु परिवर्तन के पूरी दुनिया पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने यहां जलवायु सम्मेलन (COP27) में बोलते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन की दर को नियंत्रित करने के लिए जलवायु शमन की वैश्विक गति पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके कारण पूरी दुनिया को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में बड़े पैमाने पर नुकसान का कारण बनने वाले प्राकृतिक खतरों को स्वीकार करने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन को लेकर 'सभी के लिए प्रारंभिक चेतावनी' जारी करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के एजेंडे का पूरी तरह से समर्थन करता है।
उन्होंने कहा कि प्रशांत और कैरिबियन क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तीव्रता के कारण छोटे उष्णकटिबंधीय राज्यों ने औसी घटनाओं में कुछ ही घंटों में अपनी राष्ट्रीय आय का 200 प्रतिशत खो दिया है। इस तरह की घटनाओं के विनाशकारी परिणाम उन देशों में हो सकते हैं जिनके पास इससे निपटने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु वित्त अभी भी दुर्लभ है। ऐसे में प्रारंभिक चेतावनी प्रसार के रूप में जलवायु अनुकूलन जीवन और आजीविका की सुरक्षा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालातों में 'सभी के लिए प्रारंभिक चेतावनी' न केवल तत्काल भौतिक प्रभावों को रोकने में बल्कि दूरगामी दुष्प्रभावों को कम करने में भी एक भूमिका निभाती है।
इसमें बोलते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत सभी जल-मौसम संबंधी खतरों के लिए शुरू से आखिर तक पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने पर काम कर रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले 15 सालों में देश में चक्रवातों के कारण देश में होने वाली मौतों में 90 प्रतिशत तक की कमी आई है।
उन्होंने बताया कि चक्रवातों के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली लगभग पूरे पूर्वी और पश्चिमी तटों को कवर करती है। इतना ही नहीं, भारत भीषण गर्मी जैसे अन्य खतरों के लिए प्रारंभिक चेतावनी के मामले में तेजी से प्रगति कर रहा है। मिस्र के समुद्र तटीय शहर शर्म अल-शेख में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए चर्चा के वास्ते दुनियाभर से प्रतिनिधि रविवार को एकत्र हुए। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया कई अन्य संकटों से जूझ रही है। इनमें यूक्रेन युद्ध, महंगाई, भोजन और उर्जा शामिल हैं।