वहीं, दुनियाभर में टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था फाइनैंशल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने जून के आखिर में पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में रखने का फैसला किया था। दरअसल, एफएटीएफ का मानना था कि पाकिस्तान अपने यहां लश्कर और जेईएम जैसे आतंकी समूहों की टेरर फंडिंग को रोकने में नाकामयाब रहा।
एफएटीएफ का मानना था कि पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों की टेरर फंडिंग पर रोक लगाने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाए। एफएटीएफ की बैठक में यह तय हुआ था कि पाकिस्तान को अक्तूबर में होने वाली अगली बैठक तक के लिए 'ग्रे लिस्ट' में ही रखा जाएगा।