फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बांग्लादेश: इस साल की बाढ़ किसी प्रलय से कम नहीं; 11 जिलों के लगभग 58 लाख लोग प्रभावित

Thu, 12 Sep 2024 12:11 PM IST
अभिषेक दीक्षित यूएन हिंदी समाचार

सार

बांग्लादेश में UNFPA की स्थानीय प्रतिनिधि और फिलहाल यूएन कार्यालय में रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर A.I. का कार्यभार सम्भाल रहीं क्रिल्टीन ब्लोकस ने बाढ़ की ताजा स्थिति पर खास बातचीत में बताया कि चूंकि यह बाढ़, उत्तरी बांग्लादेश में पहले आई बाढ़ व मई में चक्रवात रीमल के तुरंत बाद आई है, तो ऐसे में हालात और भी खराब हो गए हैं।
विज्ञापन
क्रिल्टीन ब्लोकस ने बाढ़ की ताजा स्थिति पर बात की - फोटो : UN
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बांग्लादेश के पूर्वी हिस्से में बाढ़ के कारण 11 जिलों के लगभग 58 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ ने घरों, स्कूलों और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। कुल मिलाकर पिछले 34 वर्षों में बांग्लादेश के पूर्वी हिस्से में यह सबसे भयंकर बाढ़ है। अभी तक 52 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है 5 लाख से अधिक लोग आश्रय की तलाश में हैं। नदियों के बढ़ते पानी ने चट्टोग्राम और सिलहट डिविजन में बहुत से घरों, सड़कों और खेतों को जलमग्न कर दिया है। लाखों बच्चे और परिवार बिना भोजन और आपातकालीन राहत सामग्री के ही, बाढ़ग्रस्त इलाकों में फंसे हुए हैं। 

विज्ञापन


बांग्लादेश में UNFPA की स्थानीय प्रतिनिधि और फिलहाल यूएन कार्यालय में रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर A.I. का कार्यभार सम्भाल रहीं क्रिल्टीन ब्लोकस ने बाढ़ की ताजा स्थिति पर यूएन न्यूज के साथ एक खास बातचीत में बताया कि चूंकि यह बाढ़, उत्तरी बांग्लादेश में पहले आई बाढ़ व मई में चक्रवात रीमल के तुरंत बाद आई है, तो ऐसे में हालात और भी खराब हो गए हैं। तीन आपातकालीन स्थितियों ने बांग्लादेश भर में 1.3 करोड़ से अधिक लोगों को प्रभावित किया है, जिसमें 50 लाख बच्चे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में चक्रवातों, बाढ़ और अन्य चरम मौसम की घटनाओं की आवृत्ति, गम्भीरता और अप्रत्याशितता बढ़ने की एक बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन है।

बांग्लादेश के कई पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में भारी बारिश के कारण बाढ़ आई है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र कौन से हैं और वहां की जमीनी स्थिति क्या है?
विज्ञापन

क्रिस्टीन ब्लोकस: बांग्लादेश एक डेल्टा क्षेत्र में स्थित है, इसलिए यह अक्सर बाढ़ से प्रभावित रहता है। हालांकि इस बार की बाढ़ असाधारण और अभूतपूर्व है। यह एक प्रलय से कम नहीं है। हमने पिछले 30 वर्षों में ऐसी बाढ़ कभी नहीं देखी।

बाढ़ और भूस्खलन ने रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों को भी प्रभावित किया है। वहां की स्थिति क्या है और उनकी मदद कैसे की जा रही है?
क्रिस्टीन ब्लोकस: शिविरों में ज़्यादातर ढांचे अस्थाई हैं, वे बांस व ऐसी अन्य सामग्री से बने हैं जो आसानी से नष्ट हो जाते हैं। लगभग 20 हजार आश्रय पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। अतः ऐसी स्थिति में हमें पुनःनिर्माण की सख्त आवश्यकता है। हमें 4 हजार से अधिक परिवारों को शिविरों से स्थानांतरित करना पड़ा है। इन 33 शिविरों में लगभग 10 लाख लोग रहते हैं और निश्चित रूप से ऐसी घटना का प्रभाव बहुत भयावह है। UNHCR के नेतृत्व में रोहिंग्या शिविरों में कार्रवाई पहले से ही चल रही है। शिविरों में पहले से तैयारी भी की गई है क्योंकि दुर्भाग्यवश इस तरह की घटनाएं समय-समय पर होती रहती हैं। शरणार्थी समुदाय के भीतर प्रशिक्षित स्वयंसेवक हैं, जो तैयारी व सहायता प्रदान करने में एक-दूसरे की मदद करते हैंञ

2017 में रोहिंग्या लोगों के आगमन के बाद से, वहां बहुत से प्रयास किए गए हैं। इनमें से वनों को फिर से बहाल करने के प्रयास, ताकि भूस्खलन को रोका जा सके। उल्लेखनीय हैं कि हम इसका कुछ सकारात्मक प्रभाव देख रहे हैं। रोहिंग्या लोगों के लिए एक मानवीय कार्यकर्ताओं की संयुक्त प्रतिक्रिया योजना भी बनाई गई है, जिसका लक्ष्य रोहिंज्या शिविरों और आसपास के बांग्लादेशी समुदायों के 13 लाख लोगों तक पहुंचने का है। इस साल के लिए 80 करोड़ डॉलर से अधिक राशि की सहायता की मांग की गई है और हमें अंदाजा है कि जितना असर नजर आ रहा है, उससे जरूरतें और भी बढ़ सकती हैं।

इस बाढ़ के कारण कितने लोगों को तत्काल मदद की आवश्यकता है और विभिन्न UN एजेंसियां किस प्रकार से मदद कर रही हैं?
क्रिस्टीन ब्लोकस:
हम, संयुक्त राष्ट्र और हमारे मानवीय साझीदारों के साथ मिलकर, सरकार के समर्थन और समन्वय में उन प्राथमिकताओं पर जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं, जिन्हें हमने सरकार के समर्थन और समन्वय से निर्धारित किया है। बहुत सारा काम पहले से ही किया जा रहा है, जैसे आपातकालीन खाद्य सहायता प्रदान करना, साफ पानी उपलब्ध कराना, गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी में मदद करना आदि। यह कार्य सीधे तौर पर और नकद सहायता प्रदान करके भी किया जा रहा है, ताकि लोग अपनी सबसे जरूरी आवश्यकताओं को प्राथमिकता दे सकें।

हमने मानवीय साझेदारों के संग समन्वय कर अपनी आपूर्ति बढ़ाई है, और जो भी धन हम जुटा सकते थे, उसे एकत्र कर रहे हैं, जिसमें CERF (मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय) से प्राप्त 40 लाख डॉलर भी शामिल हैं, लेकिन याद रखें कि हम मई से अब तक चार प्रमुख आपदाओं का सामना कर रहे हैं। मई में एक चक्रवात आया था और उसके बाद से तीन बड़ी बाढ़ की घटनाएं हो चुकी हैं। हमने पहले ही 7 करोड़ 90 करोड़ की एक बाढ़ आपातकालीन योजना बनाई थी, लेकिन इसे 20% भी धनराशि नहीं मिली थी। अब इस नवीनतम अभूतपूर्व घटना के साथ, हमें उस योजना को संशोधित करना पड़ रहा है ताकि हम यहाँ देखे जा रहे सभी नुक़सान को शामिल कर सकें।

क्या आपदा की पूर्व-तैयारी के लिए भी कुछ उपाय किए गए थे? विशेष रूप से क्या संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों के पास ऐसी आपदाओं के लिए पूर्व-योजना होती है और क्या वो घटना घटने से पहले, उसका सामना करने के लिए तैयार रहते हैं?
क्रिस्टीन ब्लोकस:
निश्चित रूप से हम तैयारी के लिए बहुत काम करते हैं. हम जानते हैं कि चक्रवात और मानसून हर साल बांग्लादेश को प्रभावित करते हैं, और बाढ़ जैसी घटनाएं का होना आश्चर्यजनक नहीं है। इसलिए हम पहले से ही आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं और अपनी समन्वय संरचनाओं को तैयार करते हैं। हम सरकार के साथ बहुत निकट सम्पर्क के साथ काम करते हैं।

हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि हम यह रेखांकित करें कि बांग्लादेश के इस पूर्वी क्षेत्र में बाढ़ के ये हालात अभूतपूर्व हैं। यह ऐसा कुछ है जो हमने पहले कभी इस पैमाने पर नहीं देखा। यह एक ऐसा क्षेत्र है जो आमतौर पर बड़े पैमाने पर बाढ़ से प्रभावित नहीं होता और इसलिए पूर्व-तैयारी के उपाय उसी तरह से लागू नहीं किए गए जैसे अन्य अधिक प्रभावित, तटीय और मुख्य नदियों के निकट, क्षेत्रों में किए जाते हैं। हम मौसम पूर्वानुमान पर नियमित रूप से नजर रखते हैं, लेकिन यह घटना आकस्मिक बाढ़ (flash floods) की थी, जिसका पूर्वानुमान लगाना मुश्किल था।

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि जलवायु परिवर्तन इन बदलते मौसम रुझान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे इस तरह की आकस्मिक आपदाएँ घटती हैं. और यह वास्तव में महत्वपूर्ण है कि हम बांग्लादेश और अन्य स्थानों पर काम करने के तरीक़े में इसका ध्यान रखें। ये घटनाएं समय के साथ और भी अधिक गम्भीर होती चली जाएंगी। अतः हमें काम करने के ऐसे उपाय अपनाने की आवश्यकता है जो समुदायों को इन नियमित घटनाओं के झटकों का बेहतर सामना करने में मदद करें।

जलवायु परिवर्तन के दृष्टिकोण से अगर हम दीर्घकालिक बात करें, तो संयुक्त राष्ट्र सरकार के साथ मिलकर देश में आपदा प्रबंधन उपायों को कैसे बढ़ावा दे रहा है? पिछले कुछ वर्षों में जीवन और सम्पत्ति का न्यूनतम नुकसान सुनिश्चित करने के लिए क्या बदलाव किए गए हैं?
क्रिस्टीन ब्लोकस:
इसे ‘पूर्वानुमानात्मक कार्रवाई’ कहा जाता है और बांग्लादेश इस क्षेत्र में अग्रणी है। हम कुछ हद तक भविष्यवाणी कर सकते हैं कि चक्रवात या बाढ़ कब आएगी, जिसके फलस्वरूप, हम पहले से आपूर्ति तैयार कर सकते हैं और प्रभावित होने वाले किसानों और परिवारों को नकदी सहायता प्रदान कर सकते हैं ताकि वे अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं बेहतर तैयारी कर सकें।

बांग्लादेश सरकार के पास आपात स्थितियों से निपटने के लिए अच्छी संरचनाएं हैं और संयुक्त राष्ट्र एवं मानवीय साझीदारों के साथ हमारा काम हमेशा सरकार के समर्थन में, तथा उसके साथ मिलकर होता है। हम सुनिश्चित करते हैं कि हम साथ मिलकर तैयार रहें।

क्या बांग्लादेश में हाल ही के राजनैतिक संकट के कारण, राहत और पुनर्वास प्रयासों में कोई बाधा आई है?
क्रिस्टीन ब्लोकस:
जुलाई में बांग्लादेश में सरकार का परिवर्तन हुआ। ये राजनैतिक बदलाव छात्रों के विरोध और नागरिक अशांति के कारण हुआ और अब यहां एक अंतरिम सरकार काम कर रही है। इस अंतरिम सरकार को बहुत जल्दी इन अभूतपूर्व बाढ़ों से निपटने की चुनौती मिली है। अभी हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं कि हमसे जितना सम्भव हो सके उतना समर्थन प्रदान करें और हमने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर भी अधिकाधिक समर्थन देने की पेशकश की है।
विज्ञापन


(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें