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4 साल की उम्र में जेल से PM की कुर्सी तक: जानिए 'डार्क प्रिंस' तारिक रहमान का राजनीतिक सफर और परिवार की कहानी

Fri, 13 Feb 2026 11:39 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

तारिक रहमान का परिवार बांग्लादेश की राजनीति में दशकों से प्रभावशाली रहा है। पिता जिया उर रहमान राष्ट्रपति और बीएनपी के संस्थापक थे तो मां खालिदा जिया पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी अध्यक्ष। आइए अब जानते हैं कि तरिक रहमान के परिवार में कौन-कौन है? और क्या इतिहास हा है?

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तारिक रहमान का परिवार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बांग्लादेश के 2026 के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की ऐतिहासिक जीत में तारिक रहमान की रणनीतिक और करिश्माई भूमिका ने केंद्रबिंदु की तरह काम किया। लंबे निर्वासन और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने पार्टी को एकजुट किया, युवा मतदाताओं को आकर्षित किया और जनसमर्थन की नई लहर खड़ी की। यह जीत सिर्फ बीएनपी की नहीं, बल्कि तारिक रहमान की नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरी है।

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इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि बांग्लादेश की राजनीति दशकों से दो मुख्य पारिवारिक‑राजनीतिक धारणाओं के बीच घूमती रही है। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत खालिदा जिया की विरासत के बीच। ऐसे में 2026 के चुनावों में बीएनपी की जीत और तारिक रहमान की उभरती भूमिका यह संकेत देती है कि अब देश का नेतृत्व एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर सकता है। 

पहले तारिक रहमान के बारे में जानिए
20 नवंबर 1965 को जन्मे तारिक रहमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता और पार्टी के चेयरमैन हैं। वह पार्टी की सर्वोच्च राजनीतिक इकाई का नेतृत्व करते हैं। अपनी शुरुआती पढ़ाई ढाका के बीएएफ शाहीन कॉलेज से करने के बाद उन्होंने ढाका रेजिडेंशियल मॉडल कॉलेज से आगे की पढ़ाई की। उनकी उच्च शिक्षा ढाका यूनिवर्सिटी से हुई। यहीं से उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू किया। 
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वे बांग्लादेश के इतिहास में एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता जिया उर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति और स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे, जिनकी 1981 में हत्या हो गई थी। वहीं, उनके एक छोटे भाई भी थे, जिनका नाम अराफात रहमान (कोको) था। 

उनकी मां बेगम खालिदा जिया 1991 से 1996 व 2001 से 2006 तक बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं और बीएनपी की प्रमुख चेयरपर्सन थीं। अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों से ही तारिक अपने परिवार की राजनीति में शामिल रहे हैं और बीएनपी के भीतर स्थायी भूमिका निभाई है। 

जब चार साल की उम्र में जेल गए थे तारिक
तारिक रहमान, जिन्हें बांग्लादेश की राजनीति में अक्सर तारिक जिया कहा जाता है, अपने परिवार के नाम से ही पहचान रखते हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान वे केवल चार साल के थे और कुछ समय के लिए हिरासत में भी रहे। इसी वजह से उनकी पार्टी बीएनपी उन्हें युद्ध के सबसे कम उम्र के बंदियों में शामिल बताकर सम्मान देती है। उनकी राजनीतिक पहचान भी इसी पारिवारिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ी है। छोटे उम्र में संघर्ष और परिवार की विरासत ने उन्हें बांग्लादेश की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा बना दिया।

शीर्ष नेता के रूप में उभरे
रहमान वर्ष 2001 में 35 वर्ष की उम्र में सक्रिय राजनीति में उभरे और 2002 में बीएनपी में वरिष्ठ पद पर पहुंच गए। उनके तेज उभार को विपक्ष ने भाई-भतीजावाद बताया, लेकिन वे संगठनात्मक रणनीतिकार और सख्त नेतृत्व के लिए पहचाने गए। औपचारिक पद नहीं होने के बावजूद उन्होंने पार्टी पर मजबूत पकड़ बनाई, कार्यवाहक अध्यक्ष बने और 30 दिसंबर को खालिदा के निधन के बाद बीएनपी अध्यक्ष के रूप में काम शुरू किया।

कानूनी मामले और विवाद  
अवामी लीग शासन के दौरान रहमान पर भ्रष्टाचार, धन शोधन, अवैध संपत्ति और तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की कथित हत्या की साजिश - से जुड़े मामलों सहित कई प्रकरणों में उन्हें अनुपस्थिति में दोषी ठहराया गया। वे 17 महीनों तक हिरासत में भी रहे। रहमान ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। रहमान को 2007 में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान उन्होंने जेल में मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया।

लंदन में स्व-निर्वासन और सब कुछ
2008 में अवामी लीग की भारी जीत के बाद वे उपचार के लिए लंदन चले गए, जहां वह करीब 17 साल रहे। उन्होंने पार्टी की रणनीति और संगठन पर नियंत्रण बनाए रखा, जो दक्षिण एशियाई राजनीति में असामान्य स्थिति मानी जाती है। दिलचस्प तथ्य यह है कि तारिक रहमान कभी भी राष्ट्रीय संसद के सदस्य नहीं रहे। उनका प्रभाव चुनावी पद से नहीं, बल्कि संगठनात्मक नियंत्रण, पारिवारिक विरासत और पार्टी नेतृत्व से उभरकर सामने आया है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं तारिक रहमान कब मिला?
तारिक रहमान समर्थकों के लिए जियाउर रहमान की विरासत और प्रतिस्पर्धी लोकतंत्र की बहाली का प्रतीक हैं। आलोचकों के लिए वह वंशवादी राजनीति और जवाबदेही से जुड़े अनसुलझे सवालों का प्रतिनिधित्व करते हैं।ज ब बीएनपी के नेतृत्व वाला गठबंधन जमात-ए-इस्लामी के साथ - सत्ता में था, उसी दौर में तारिक रहमान को 'डार्क प्रिंस' उपनाम मिला।



अब तारिक रहमान की मां खालिदा जिया के बारे में जानिए
तारिक रहमान की मां और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने 3 जनवरी 1982 को पहली बार बीएनपी के सदस्य के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। बाद में वे बीएनसपी की अध्यक्ष बनीं और अपनी मौत तक वह इस पद पर रहीं। बांग्लादेश में सैन्य शासन के खिलाफ खालिदा जिया एक प्रमुख आवाज बनकर उभरीं। लोगों को सैन्य शासन के खिलाफ एकजुट करने में खालिदा जिया ने अहम भूमिका निभाई। 

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जिया 1991 में पहली बार बनीं पीएम
खालिदा जिया साल 1991 में पहली बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। इसके साथ ही बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव भी हासिल किया। इसके बाद साल 2001 से 2006 तक दूसरी बार भी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। बताते चले कि खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1946 को अविभाजित भारत के दिनाजपुर जिले में हुआ। उनकी माता का नाम तैयबा और पिता का नाम इसकंदर मजूमदार था।

खालिदा का परिवार जलपाईगुड़ी में चाय का व्यापार करता था और वहां से पलायन करके दिनाजपुर पहुंचा था। साल 1960 में खालिदा जिया की शादी आर्मी कैप्टन जिया उर रहमान के साथ हुई, जो बाद में बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने। साल 1983 में जब खालिदा बीएनपी चीफ बनीं तो उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने खालिदा की काबिलियत पर शक जताते हुए पार्टी छोड़ दी। 

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तारिक रहमान के पिता और पूर्व बांग्लादेशी राष्ट्रपति
अब तारिक रहमान के पिता के बारे में जानते हैं। तारिक रहमान के पिता जिया उर रहमान ने बांग्लादेश के एक प्रमुख राजनीतिक और सैन्य नेता थे। वे 19 जनवरी 1936 को बोगरा जिले में जन्मे थे और साल 1981 में उनकी हत्या कर दी गई। जिया उर रहमान ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता संग्राम 1971 में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने ही बांग्लादेश को स्वतंत्र देश घोषित किया था। 

स्वतंत्रता के बाद जिया उर रहमान बांग्लादेश की सेना में तेजी से उभरे और 1975 में हुए सैन्य संघर्ष और राजनीतिक संकट के दौरान उन्होंने सत्ता संभाली। 1977 में उन्हें बांग्लादेश का राष्ट्रपति नियुक्त किया गया। उनके राष्ट्रपति कार्यकाल में देश ने कई राजनीतिक और आर्थिक सुधारों का अनुभव किया। जिया उर रहमान ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की स्थापना की, जो आज भी देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में से एक है और इस बार के चुनाव में तारिक रहमान के अगुवाई में पार्टी ने प्रंचड बहुमत हासिल किया है। 

बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता में जिया उर रहमान की भूमिका
ध्यान देने वाली बात यह है कि जिया उर रहमान की नीतियों और राजनीतिक दृष्टिकोण ने बांग्लादेश की राजनीति में स्थिरता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया। ऐसे में जिया उर रहमान की राजनीतिक विरासत उनके बेटे तारिक रहमान और बीएनपी के माध्यम से आज भी जारी है। उनके नेतृत्व ने बांग्लादेश की राजनीति में सेना और लोकतांत्रिक संस्थानों के बीच संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अब समझिए जिया उर रहमान की हत्या कैसे हुई थी?
अब बात करते है कि जिया उर रहमान की हत्या कैसे हुई। इस हत्याकांड को समझने के लिए हमें 1981 के दौरे में जाना पड़ेगा। दिन था 30 मई 1981 का। जब जिया उर रहमान चटगांव की यात्रा पर गए थे। वे उस समय देश के राष्ट्रपति थे और सेना प्रमुख के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। उनकी हत्या एक सैन्य विद्रोह के दौरान हुई, जिसे 'चटगांव विद्रोह' भी कहा जाता है। बताया जाता है कि कुछ असंतुष्ट सैनिकों ने जिया उर रहमान की सुरक्षा में सेंध लगाई और उन्हें गोली मार दी। इस घटना के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक संकट पैदा हो गया और सेना और सरकार के बीच अस्थिरता फैल गई।

उनकी हत्या के पीछे राजनीतिक विरोध और सत्ता संघर्ष को प्रमुख कारण माना जाता है। कई स्रोतों के अनुसार, इस विद्रोह में शामिल सैनिक जिया उर रहमान की नीतियों और उनके नेतृत्व से असंतुष्ट थे। उनकी हत्या के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति पद खाली हो गया और बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई।

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तारिक रहमान की पत्नी जुबैदा कौन हैं?
जुबैदा रहमान तारिक रहमान की पत्नी हैं और पेशे से चिकित्सक। वे अपने पति के राजनीतिक जीवन में समर्थक और साथ देने वाली भूमिका निभाती रही हैं। चुनावी अभियानों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अक्सर उनके साथ नजर आती हैं। निजी जीवन में परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों में सक्रिय रहते हुए वे बीएनपी के भीतर तारिक की छवि को मजबूत करती हैं।

तारिक रहमान की बेटी
अब बात अगर तारिक रहमान की बेटी के बारे में करें तो जाइमा रहमान तारिक रहमान की बेटी हैं। वे राजनीतिक जीवन में अपने पिता के साथ दिखाई देती हैं, विशेषकर चुनावी अभियानों और सामाजिक कार्यक्रमों में। हालांकि वे सार्वजनिक राजनीति में अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हैं, लेकिन युवा समर्थकों और परिवारिक दृष्टि से उनकी उपस्थिति ने बीएनपी के प्रचार और छवि को और व्यापक बनाया है। अच्छा इन सब के बीच एक दिलचस्प बात ये है कि तारिक रहमान के साथ उनकी पारिवारिक पालतू बिल्ली जेबू भी खूब सुर्खियों में रही है। वह लंदन से ढाका लौटने के दौरान उनके साथ आई। 
 
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