बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनने के बाद लगातार मानवाधिकार उल्लंघन और हिंसा की घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 60वें सत्र के दौरान जेनेवा में आयोजित एक साइड इवेंट में दक्षिण एशिया और यूरोप के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने स्थिति को गंभीर बताया। यह चर्चा ‘बांग्लादेश में मौलिक मानवाधिकारों, कानून के शासन और लोकतंत्र का उल्लंघन’ शीर्षक से लैंगिक न्याय केंद्र की ओर से आयोजित की गई।
अंतरिम शासन और मानवाधिकार संकट
5 अगस्त 2024 में निर्वाचित प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाए जाने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सत्ता में आई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह शासन न तो सुधार लाया और न ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत किया। इसके बजाय विरोधियों को दबाने और चुनावों को असंभव बनाने का काम किया गया। कार्यक्रम के दौरान एक लघु फिल्म भी दिखाई गई जिसमें फर्जी मुठभेड़ों में हत्याएं, धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले, मंदिरों और सूफी दरगाहों का विध्वंस दिखाया गया। फिल्म में यह भी उजागर हुआ कि कट्टरपंथी इस्लामी समूह खुलेआम राजनीतिक कार्यकर्ताओं को धमका रहे हैं और मीडिया संस्थानों पर हिंसक हमले हो रहे हैं।
चर्चा में कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हुए जिनमें प्रो. मोहम्मद हबीबे मिल्लत (ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस, कनाडा), पाउलो कसाका (पूर्व यूरोपीय सांसद, बेल्जियम), सुहास चक्रमा (राइट्स एंड रिस्क्स एनालिसिस ग्रुप, भारत), नतालिया सिनेएवा-पानकोव्स्का (पोलैंड) और क्रिस ब्लैकबर्न (ब्रिटेन) थे।
बेल्जियम के पूर्व यूरोपीय सांसद पाओलो कसाका ने कहा लोगों ने सोचा था कि सत्ता परिवर्तन लोकतंत्र बहाली के लिए होगा, लेकिन इसे कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने हाइजैक कर लिया। अब वे अल्पसंख्यकों से शुरू होकर पूरे देश को निशाना बना रहे हैं।
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अंतरिम सरकार के आने के बाद से 213 अवामी लीग नेताओं की हत्या हुई
प्रो. मिल्लत ने कहा कि अंतरिम सरकार के आने के बाद से 213 अवामी लीग नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। 1971 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को नष्ट किया गया है। पिछले 14 महीनों में 637 लोग भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मारे गए, जिनमें अल्पसंख्यक समुदाय के 30 सदस्य भी शामिल हैं। 2024 के क्रिसमस डे पर 17 चर्चों में आग लगाई गई। अब तक 2500 से अधिक यातना के मामले दर्ज किए गए हैं।
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मानवाधिकार उल्लंघन पिछले 54 वर्षों में चरम पर
उन्होंने कहा, मानवाधिकार उल्लंघन पिछले 54 वर्षों में सबसे ज्यादा स्तर पर हैं। यह सिर्फ अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी समुदाय प्रभावित हो रहे हैं। मौजूदा शासन अब एक धोखाधड़ी वाले चुनाव की कोशिश कर रहा है। बांग्लादेश को फिर से लोकतंत्र, कानून का राज और न्याय की ओर लौटना होगा। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर से बांग्लादेश की बिगड़ती स्थिति और अंतरिम सरकार के दमनकारी कदमों को लेकर चिंता का बड़ा संकेत माना जा रहा है।