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Pakistan: 'पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता अगर बढ़ा तो बनेगा नाटो जैसा गठबंधन'; गाजा शांति प्रस्ताव पर भी बोले डार

Fri, 03 Oct 2025 11:15 PM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
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इशाक डार - फोटो : ANI
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पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने शुक्रवार को कहा कि कई देशों ने पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते में शामिल होने में रुचि दिखाई है। अगर और अधिक देश इस सऊदी-पाकिस्तान संयुक्त रक्षा समझौते में शामिल होते हैं, तो यह नाटे जैसा गठबंधन बन सकता है। डार ने संसद में यह टिप्पणी हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित गाजा शांति योजना पर बात करते हुए की। उन्होंने कहा कि अरब और गैर-अरब इस्लामी देशों ने इस समझौते में शामिल होने की इच्छा जताई है।

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उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान एक दिन इस्लामी दुनिया का नेतृत्व करेगा, और 57 इस्लामी देशों का नेतृत्व करने का लक्ष्य है। डार ने कहा कि पाकिस्तान पहले ही न्यूक्लियर और मिसाइल शक्ति है, लेकिन अब इसे आर्थिक शक्ति बनने के लिए भी प्रयास करना होगा। डार ने सऊदी अरब के साथ समझौते पर कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच संबंध लंबे समय से मजबूत हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता जल्दीबाजी में नहीं, बल्कि गंभीर विचार के बाद किया गया।

कतर पर इस्राइली हमले के बाद से अरब देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी
समझौते के अनुसार, किसी भी देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। डार ने मई में भारत के साथ चार दिवसीय संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर तब यह समझौता लागू होता, तो उस हमले को सऊदी अरब पर हमला माना जाता। यह समझौता उस समय हुआ जब इस्राइल ने कतर पर हमला किया, जिससे अरब देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
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गाजा शांति प्रस्ताव ट्रंप का है पाकिस्तान का नहीं
इशाक डार ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पेश किया गया गाजा शांति योजना पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों के प्रस्ताव से अलग है। डार ने कहा कि ट्रंप की योजना में हमारे मसौदे में किए गए बदलाव शामिल हैं पर यह हमारी योजना से पूरी तरह मेल नहीं खाता। उन्होंने यह टिप्पणी जमात-ए-इस्लामी और अन्य धार्मिक समूहों की आलोचना के बीच की, जिन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर पाकिस्तान इस्राइल को मान्यता देता है, तो विरोध प्रदर्शन होंगे। डार ने कहा कि पाकिस्तान इस्राइल को मान्यता देने की तैयारी में नहीं है, और मुस्लिम देशों के हितों के अनुसार ही कदम उठाए जाएंगे।

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