हत्यारे को जिस गांव में दफनाया, वहां के निवासी खफा
अब्दुल मजीद का शव शंभुपुर स्थित सोनारगांव में उसके ससुराल वालों के पास लाया गया। यहां उसे पारिवारिक कब्रिस्तान में दफनाया गया। लेकिन इससे क्षेत्रीय लोग व आवामी लीग के कार्यकर्ता खफा हो गए और कब्रिस्तान के बाहर प्रदर्शन किया। स्वतंत्रता सेनानी सैफुल इस्लाम भूइयान ने शव को वहां से हटाने की मांग की। पुलिस ने सरकार के आदेशों के तहत शव दफनाने की बात कही और लीग के नेताओं को सरकार से बात करने को कहा।
कोलकाता में 23 साल रहा मजीद
बांग्लादेश की आतंकी निरोधक व पुलिस की यूनिट ने मजीद को मीरपुर में पकड़ा था। वह 23 साल भारत में कोलकाता में छिपकर रहा और 15 मार्च को बांग्लादेश आया था। इससे पहले सैयद फारुख रहमान, सुल्तान शहरयार राशिद खान, बजलुल हुदा, एकेएम मोहिउद्दीन अहमद और मोहिउद्दीन अहमद को 2010 में फांसी दी गई थी। एक हत्यारा अजीज पाशा जिम्बाब्वे में जून 2001 में मर गया था।