बांग्लादेश चुनाव 2026 के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। कट्टरपंथी इस्लामी दल जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने गुरुवार को मतदान करने के बाद दावा किया कि यदि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होते हैं, तो उनकी पार्टी जनादेश के आधार पर सत्ता हासिल कर सकती है।
ढाका के मोनीपुर हाई स्कूल और कॉलेज स्थित मतदान केंद्र पर वोट डालने के बाद रहमान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे देश में ऐसी सरकार की उम्मीद करते हैं जो किसी व्यक्ति, परिवार या खास पार्टी की नहीं, बल्कि पूरे देश के 18 करोड़ नागरिकों की सरकार हो।
जनता का फैसला सभी को मानना चाहिए
स्थानीय अखबार द डेली स्टार के अनुसार, शफीकुर रहमान ने कहा अगर वोटिंग स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होती है, तो हम परिणाम स्वीकार करेंगे। दूसरों को भी जनता का फैसला मानना चाहिए। उन्होंने यह भी प्रार्थना की कि चुनाव शांतिपूर्ण, हिंसा रहित और सभी पक्षों को स्वीकार्य हो। उनका कहना था कि देश को ऐसी सरकार की जरूरत है जो राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बने।
ये भी पढ़ें:- Bangladesh Election 2026 Live: गोपालगंज सदर में मतदान स्थल पर विस्फोट, तीन घायल; दोपहर 12 बजे तक 32.88% मतदान
वोटरों को 15,000 टका देने का आरोप
हालांकि, चुनावी माहौल के बीच जमात-ए-इस्लामी पर गंभीर आरोप भी लगे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पार्टी से जुड़े लोगों ने मतदाताओं को कथित रूप से 15,000 बांग्लादेशी टका देने का प्रस्ताव रखा। रिपोर्ट्स के अनुसार, देशभर में ऐसे पर्चे बांटे गए जिनमें दावा किया गया कि जो परिवार पार्टी को वोट देंगे, उनकी अगली जिंदगी पाप मुक्त होगी और उन्हें गंभीर सजा से मुक्ति मिलेगी।
कैमरा फोन से सबूत मांगने का विवाद
एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि मतदाताओं से मतदान केंद्र पर कैमरा फोन लाने और बैलेट पेपर पर पार्टी के चुनाव चिह्न दारी पल्ला (तराजू) पर मुहर लगाने के बाद उसकी तस्वीर लेने को कहा गया। पर्चे में यह भी उल्लेख था कि चुनाव परिणाम आने के बाद वोटरों को बीकैश एप या नकद माध्यम से 15,000 टका भेजे जाएंगे और कुछ अग्रिम भुगतान का भी वादा किया गया था। इन आरोपों के बाद बांग्लादेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों और चुनाव पर्यवेक्षकों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
(इनपुट:- आईएएनएस)