Bangladesh: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सफाई दी है कि उसने शेख मुजीबुर्रहमान के राष्ट्रपिता का दर्जा बरकरार रखा है। जमुका अधिनियम में संशोधन कर स्वतंत्रता सेनानियों की नई परिभाषा और चार श्रेणियां तय की गई हैं, जिनमें हथियारबंद योद्धा, राजनयिक, कलाकार व सहयोगी शामिल हैं।
बांग्लादेश में 1970 के चुनाव जीतने वाले 400 से ज्यादा राजनेताओं की स्वतंत्रता सेनानी की रद्द मान्यता में देश मुजीबुर्रहमान के शामिल होने के बाद अंतरिम सरकार ने सफाई दी कि रहमान का स्वतंत्रता सेनानी दर्जा यथावत है। उसे रद्द नहीं किया गया है। इससे पहले सरकार ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता सेनानी परिषद, जमुका अधिनियम में संशोधन करते हुए एक अध्यादेश जारी कर वीर स्वतंत्रता सेनानी की नई परिभाषा तय की थी।
अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के उप प्रेस सचिव आजाद मजूमदार ने बताया, जमुका अधिनियम में संशोधन के बावजूद शेख मुजीब का स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा रद्द नहीं किया गया है। बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, शेख मुजीब समेत मुजीबनगर सरकार के नेताओं का स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा रद्द कर दिया गया है।
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मुक्ति युद्ध मामलों के मंत्रालय के सलाहकार फारुक-ए-आजम ने कहा, मुजीबनगर सरकार में जो लोग थे, वे भी स्वतंत्रता सेनानी थे। जिन लोगों ने हथियारों के साथ मुक्ति युद्ध लड़ा और जिन्होंने इसका नेतृत्व किया, वे भी स्वतंत्रता सेनानी थे। हालांकि, उस सरकार के अधिकारी और कर्मचारी मुक्ति युद्ध के सहयोगी थे। उन्होंने कहा, अध्यादेश के अनुसार स्वाधीन बांग्ला बेतार केंद्र समेत राजनयिक सहयोगी स्वतंत्रता सेनानी हैं।
स्वतंत्रता सेनानियों की 4 श्रेणियां
स्वतंत्रता सेनानियों की चार श्रेणियां बनाई गई हैं- पहली श्रेणी में वे बांग्लादेशी पेशेवर हैं जिन्होंने विदेशों में मुक्ति संग्राम में विशेष योगदान दिया और विश्व जनमत को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाई। दूसरी में मुक्ति संग्राम के दौरान बनीं बांग्लादेश सरकार (मुजीबनगर) के अधीन अधिकारी, कर्मचारी, दूत और अन्य सहायक के रूप में काम करने वाले लोग शामिल हैं। तीसरी में स्वाधीन बांग्ला रेडियो स्टेशन के सभी कलाकार और तकनीशियन और चौथी श्रेणी में स्वाधीन बांग्ला फुटबॉल टीम शामिल हैं।