Balochistan: बलूच नेता मीर अब्दुल नबी बंगुलजई ने दावा किया है कि पाकिस्तान की मदद से बलूचिस्तान में आईएसआईएस के प्रशिक्षण शिविर चल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संगठन बलूच कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर उनकी पहचान और आंदोलन को खत्म करना चाहता है। बंगुलजई ने लोगों से सतर्क रहने और धार्मिक कट्टरता के नाम पर हो रहे हमलों से बचने की अपील की।
बलूच राष्ट्रवादी नेता मीर अब्दुल नबी बंगुलजई ने एक ऑडियो बयान जारी किया। इसमें उन्होंने बलूचिस्तान के लोगों को इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) की बढ़ती मौजूदगी को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान सरकार की मदद से बलूचिस्तान के पहाड़ी इलाकों में आईएसआईएस के प्रशिक्षण बनाए गए हैं।
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बंगुलजई ने आरोप लगाया कि यह संगठन बलूच कार्यकर्ताओं और बलूच अधिकारों की बात करने वाले धार्मिक नेताओं को निशाना बना रहा है, ताकि बलूच राष्ट्रीय आंदोलन को कुचला जा सके। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बलूच समर्थक रहीम बख्श कालोई और मौलवी अब्दुल कबीर की हत्याओं के पीछे आईएसआईएस का हाथ है।
उन्होंने कहा कि यह केवल कट्टरपंथ नहीं, बल्कि बलूच पहचान, संस्कृति और प्रतिरोध को खत्म करने की सुनियोजित साजिश है, जिसमें धर्म को हथियार बनाया जा रहा है। उन्होंने लोगों को चेताया कि आईएसआईएस जैसे पापी और राज्य समर्थिक संगठनों से दूर रहें।
बंगुलजई ने यह भी कहा कि ब्रिटिश काल में भू-राजनीतिक स्थिति के कारण पाकिस्तान का जन्म हुआ है और बलूचिस्तान ने कभी स्वेच्छा से इसमें शामिल होने की मंजूरी नहीं दी। 1948 में बलूचिस्तान का जबरन विलय और कलात के खान पर दबाव इसका प्रमाण है।
उन्होंने अफगानिस्तान सहित अन्य क्षेत्रों में आईएसआईएस की ओर किए गए हमलों का हवाला दिया और कहा कि यह संगठन राष्ट्रवादी आंदोलनों को धर्म के नाम पर कमजोर करने के लिए उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने बलूच जनता से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखें, बाहरी साजिशों के खिलाफ एकजुट हों और उन संगठनों को खारिज करें, जो धर्म को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा, आईएसआईएस आस्था के लिए नहीं आया है, बल्कि वह बलूच सम्मान और आजादी को मिटाने आया है।