भारी विरोध के बीच यूरोपीय देश स्लोवाकिया में गर्भपात कानून में बदलाव कर इसे कठोर बनाया जा रहा है। व्यापक विरोध के बीच शुक्रवार को विधेयक के मसौदे पर चर्चा के बाद मतदान होना है। विधेयक पास हो गया हो तो महिलाओं को गर्भपात कराने से पहले अल्ट्रासाउंड कराना होगा और बच्चे के दिल की धड़कन सुननी होगी।
सरकार की मंशा के उलट तमाम संगठन इसे महिला के मौलिक अधिकारों के हनन के तौर पर देखते हैं। वे देशभर में इसका विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट वाच, मैरी स्टॉप्स इंटरनेशनल जैसे संगठनों का कहना है कि यह मौलिक अधिकारों के साथ ही निजता, स्वायत्तता और चिकित्सा निर्णय के अधिकारों का भी सीधे तौर पर उल्लंघन है। फ्रीडम ऑफ च्वाइस संगठन से जुड़े पाउला जोजार्ट ने कहा कि हमारा मानना है कि यह मानवाधिकार से जुड़ा मुद्दा है।
यह पहला मौका नहीं है जब स्लोवाकिया में गर्भपात पर प्रतिबंध या इसे कड़ा करने की मांग उठी है। इस साल सितंबर में देश की संसद चार ऐसे ही विधेयकों को पहले ही खारिज कर चुकी है, जिसमें गर्भपात को प्रतिबंधित करने की मांग की गई थी।