Aukus: अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन का ऑकस सौदा क्या है, इससे ऑस्ट्रेलिया को क्या मिलेगा, चीन क्यों चिढ़ा?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Tue, 14 Mar 2023 07:29 PM IST
सार
ऑकस, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के बीच एक त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन है। इसकी घोषणा मार्च 2021 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने की थी। अमेरिका और ब्रिटेन के सहयोग से ऑस्ट्रेलिया आठ परमाणु अस्त्र क्षमता से लैस पनडुब्बियां बनाएगा।
ऑकस
- फोटो : SOCIAL MEDIA
दक्षिण चीन सागर से लेकर दुनियाभर में फैले व्यापार में चीन के हस्तक्षेप को लेकर ताकतवर देश उस पर नजर बनाए हुए हैं। इसी के मद्देनजर त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन ऑकस के तहत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-संचालित पनडुब्बियां मिलने जा रही हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के नेताओं ने सोमवार को ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-संचालित हमलावर पनडुब्बियां देने की योजना का खुलासा किया। इसी बीच चीन की आपत्ति सामने आई है जो सौदे को खतरा मानता है।
ऑकस सौदा क्या है? समझौते में क्या है? ऑकस सौदे के पीछे की वजह क्या है? समझौते में शामिल तीनों देशों का क्या कहना है? इस पर चीन का क्या रुख है? आइये जानते हैं...
ऑकस
- फोटो : SOCIAL MEDIA
दक्षिण चीन सागर से लेकर दुनियाभर में फैले व्यापार में चीन के हस्तक्षेप को लेकर ताकतवर देश उस पर नजर बनाए हुए हैं। इसी के मद्देनजर त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन ऑकस के तहत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-संचालित पनडुब्बियां मिलने जा रही हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के नेताओं ने सोमवार को ऑस्ट्रेलिया को परमाणु-संचालित हमलावर पनडुब्बियां देने की योजना का खुलासा किया। इसी बीच चीन की आपत्ति सामने आई है जो सौदे को खतरा मानता है।
ऑकस सौदा क्या है? समझौते में क्या है? ऑकस सौदे के पीछे की वजह क्या है? समझौते में शामिल तीनों देशों का क्या कहना है? इस पर चीन का क्या रुख है? आइये जानते हैं...
AUKUS
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ऑकस सौदा क्या है, इसकी घोषणा कब हुई थी?
ऑकस, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के बीच एक त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन है। इसकी घोषणा मार्च 2021 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने की थी। उस वक्त बाइडेन, तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन नए गठबंधन का विस्तार करने के लिए आभासी रूप से एक साथ दिखाई दिए थे।
पनडुब्बी
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समझौते में क्या है?
अमेरिका और ब्रिटेन के सहयोग से ऑस्ट्रेलिया आठ परमाणु अस्त्र क्षमता से लैस पनडुब्बियां बनाएगा। रक्षा क्षमताओं को अधिक से अधिक साझा करने की अनुमति होगी। तीनों देश अपना ध्यान ऑस्ट्रेलिया के लिए परमाणु-संचालित पनडुब्बियों के विकास पर लगाएंगे।
एसएसएन ऑकस के तहत ब्रिटेन की अगली पीढ़ी के डिजाइन पर आधारित एक 'त्रिपक्षीय रूप से विकसित' पोत जो ब्रिटेन में बनाया जाएगा, जिसमें ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका संयुक्त रूप से तकनीकी सहयोग करेंगे। एक ऑस्ट्रेलियाई रक्षा अधिकारी ने कहा कि परियोजना की लागत 2055 तक 368 बिलियन डॉलर होगी।
ऑस्ट्रेलिया को 2030 तक तीन अमेरिकी वर्जीनिया क्लास की परमाणु-संचालित पनडुब्बियों को खरीदने की उम्मीद है। 2027 तक अमेरिका अपनी दो पनडुब्बियों को ऑस्ट्रेलिया के तटों पर तैनात करेगा।
दक्षिण चीन सागर में चीनी पोत (फाइल फोटो)
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ऑकस सौदे के पीछे की वजह क्या है?
इस समझौते को दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। विश्लेषक इस समझौते को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम बता रहे हैं। यही वजह जो इस समझौते पर चीन ने अपनी नाखुशी जताई है।
चीनी विदेश मंत्रालय
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समझौते पर चीन का क्या कहना है?
चीन इस नौसैनिक सौदे का विरोध कर रहा है। समझौते को चीन अवैध बता रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को तीनों देशों पर गलत और खतरनाक रास्ते पर चलने का आरोप लगाया है। यह पहली बार नहीं है जब चीन ने इस तरह के सौमझौते का विरोध किया हो। चीन पहले भी तीन देशों पर अप्रसार संधि को कमजोर करने और क्षेत्रीय हथियारों की दौड़ को बढ़ावा देने का आरोप लगा चुका है। इसके अलावा चीन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समझौते के खिलाफ लगातार अपनी बात रखता रहा है।