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अमेरिकी संसद पर हमलाः हिंसा में लिप्त लोगों की नौकरियों पर तलवार, एफबीआई जुटा रही रिकॉर्ड

Sat, 09 Jan 2021 04:28 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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अमेरिकी हिंसा - फोटो : PTI
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अमेरिकी संसद भवन यानी कैपिटल बिल्डिंग पर हमले व हिंसा में लिप्त लोगों को जेल की हवा खाने के साथ ही नौकरी से भी हाथ धोना पड़ेगा। अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी यानी एफबीआई हिंसा में शामिल लोगों की तेजी से पहचान में जुटी है। 

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सोशल मीडिया में हमले व हिंसा में जिन लोगों के चेहरे नजर आ रहे हैं, उनकी तेजी से तलाश जारी है। अमेरिकी प्रशासन के साथ ही कंपनियां भी अपने ऐसे कर्मचारियों की पहचान व तलाश तेज कर रही है, जो बुधवार को अमेरिकी कैपिटल पर हमले में लिप्त थे। मैरीलैंड की डायरेक्ट मार्केटिंग कंपनी नैवीस्टार ने तो अपने एक कर्मचारी की पहचान कर उसे नौकरी से निकाल दिया है। इस कर्मचारी ने प्रदर्शन के वक्त कंपनी की पहचान का आईडी कार्ड लगा रखा था।

कंपनी ने कहा कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन व अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का समर्थन करती है, लेकिन जो भी कर्मचारी दूसरों के लिए खतरा पैदा करेगा, वह नौकरी में नही रह सकेगा। टेक्सास के एक वकील पॉल डेविस को भी गूसहेड इंश्योरेंस नामक कंपनी ने सेवा से निकाल दिया है। सोशल मीडिया पोस्ट के बाद डेविस के खिलाफ कार्रवाई की गई है। 
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मरने वालों की संख्या बढ़कर पांच हुई
इस बीच, अमेरिकी संसद भवन में बुधवार को ट्रंप समर्थकों के प्रदर्शन में हुई हिंसा में घायल एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई है। अब हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। यूएस कैपिटल पुलिस के अधिकारी ब्रायन डी सिकनिक बुधवार को प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प में घायल हो गए थे। इसके बाद सिकनिक अपने कार्यालय लौटे जहां वह बेहोश हो गए। सिकनिक की मौत की जांच मेट्रोपॉलिटन पुलिस विभाग यूएससीपी और संघीय एजेंसियां करेंगी।

ट्रंप समर्थकों ने बोला था हमला
कांग्रेस सदस्य लॉयड डॉगेट ने गुरुवार को ट्वीट किया, ‘बुधवार को हुए दंगों में घायल यूएस कैपिटल पुलिस के एक अधिकारी की मौत हो गई। ट्रंप के विद्रोह भड़काने के कारण अब तक पांच लोगों की मौत हो गई। जवाबदेही तय की जानी चाहिए। कैपिटल में ट्रंप समर्थकों के हिंसक धावा बोलने के कारण कम से कम 50 पुलिस अधिकारी घायल हो गए थे जिनमें से 15 को गंभीर चोटें आईं थीं। 

आखिरकार ट्रंप ने भी की हिंसा की निंदा
अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैपिटल बिल्डिंग में अपने समर्थकों की हिंसा की बुधवार को यह कहते हुए अंततः निंदा की कि ऐसे लोग अमेरिका का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। सांसत में पड़े ट्रंप ने इसके साथ ही संकल्प लिया कि वह नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन को सत्ता का व्यवस्थित, निर्बाध और सुगम हस्तांतरण सुनिश्चित करेंगे।

जबकि इससे एक दिन पहले ही ट्रंप ने अपने समर्थकों से कैपिटल का रूख करने का आह्वान किया था, जहां भीड़ जबरन संसद भवन के भीतर घुसी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए वीडियो संदेश में कहा कि अमेरिका कानून.व्यवस्था का पालन करने वाला देश है और रहेगा। व्हाइट हाउस ने ट्रंप का यह वीडियो जारी किया। गुरुवार को इसे यूट्यूब पर पोस्ट किया गया।

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पहली बार 30 दिन तक बाड़े में रहेगी कैपिटल

अमेरिका में कैपिटल हिल पर हुए हमले को ज्यादातर मीडिया संस्थानों ने शर्मसार करने वाली घटना बताया है। इस दंगे को लोकतंत्र पर दाग बताया है। वाशिंगटन पोस्ट ने इस हमले को ट्रम्प द्वारा उकसाई भीड़ ने किया हमला लिखा है।

बंदूक बनाने वाली कंपनियों के शेयर 18% तक चढ़े
अमेरिका के स्टॉक मार्केट में बुधवार को एक खास घटना दिखी। बंदूक बनाने वाली कंपनियों के शेयर के दाम 18% तक बढ़ गए। इसी दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने अमेरिकी संसद परिसर पर धावा बोला था। स्मिथ एंड वेसन ब्रांड्स और स्ट्रम रगर अमेरिका में बंदूक बनाने वाली प्रमुख कंपनियां हैं। विस्टा आउटडोर बंदूक की गोलियां बनाती है। तीनों कंपनियां अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टेड हैं।

ब्रिटेन के टेलीग्राफ ने लिखा: डेमोक्रेसी अंडर सीज यानी लोकतंत्र पर कब्जा
ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ ने इस घटना को डेमोक्रेसी अंडर सीज यानी लोकतंत्र पर कब्जा करार दिया। टेलीग्राफ ने लिखा, ये तो बस शुरुआत है। अभी अमेरिकी लोकतंत्र की परतें और उधड़ेंगी।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा: राष्ट्रपति ट्रम्प ने भीड़ को हिंसा के लिए भड़काया
‘शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे के बाद ट्रम्प को हटाने की मांग तेज हो गई है। अखबार ने हिंसा के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को जिम्मेदार ठहराया है। लिखा कि, भीड़ को विद्रोह और हिंसा के लिए भड़काया गया।’

कतर के अलजजीरा ने लिखा: अभी तो यह सिर्फ शुरुआत है
अल-जजीरा ने लिखा, ‘अमेरिकी राजधानी में जो हुआ, वो सिर्फ शुरुआत है। आने वाले चार सालों में अमेरिकी ‘लोकतंत्र’ की परतें दुनिया के सामने खुलती रहें।’

चीन के ग्लोबल टाइम्स ने भी मजा लिया: लोकतंत्र का बुलबुला फूटा
‘अमेरिका में जो हुआ वह उसके कर्मों का फल है। लोकतंत्र का बुलबुला फूट गया। जब हॉन्गकॉन्ग में प्रदर्शन हुए थे, तब अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों की प्रशंसा की थी।’

द टाइम्स ऑफ इजरायल: लोकतंत्र और कानून पर हमला
पत्रकार डेविड होर्वोविट्ज ने अपने कॉलम में लिखा, ‘अमेरिका में लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था पर हमला, इजरायल के लिए चिंताजनक है। हमने अमेरिका पर अमेरिका के द्वारा हमला देखा है।
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