अमेरिका में हुए एक ताजा अध्ययन का निष्कर्ष है कि पिछले चालीस वर्षों में दुनिया में चीन के प्रभाव में काफी बढ़ोतरी हुई है। यूनिवर्सिटी ऑफ डेनवर और थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल की स्टडी का निष्कर्ष है कि 1980 में चीन का प्रभाव सिर्फ एक देश पर था। वो देश अल्बानिया था। लेकिन आज सब-सहारा अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में अग्रणी शक्ति बन चुका है। साथ ही दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में उसका असर तेजी से बढ़ रहा है।
इस अध्ययन में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अमेरिका और चीन के तुलनात्मक प्रभाव को मापने की कोशिश की गई। व्यापार, सुरक्षा और राजनयिक संबंधों को आधार बना कर प्रभाव का इंडेक्स बनाने की कोशिश हुई। यह देखा गया कि किसी देश या क्षेत्र के साथ चीन या अमेरिका का आयात-निर्यात कितना रहा, दोनों देशों ने उसे कितनी सहायता प्रदान की, और कितने हथियार बेचे। इसके साथ ही यह देखने का प्रयास किया गया कि कोई देश अमेरिका या चीन पर कितना निर्भर है। किसी देश का सांस्कृतिक असर कितना है, उसे इस अध्ययन में शामिल नहीं किया गया। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि उसकी माप कठिन है।
अध्ययनकर्ताओं का दावा है कि उनकी इस विधि से पिछले तीन दशक में दिखे रूझान की साफ तस्वीर उभरती है। निष्कर्ष यह है कि अमेरिका का प्रभाव ठहराव का शिकार हो गया है, यूरोप का प्रभाव घट गया है, जबकि चीन के प्रभाव में तेजी से इजाफा हुआ है। अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक साल 2000 तक चीन की सबसे प्रभावशाली देश के रूप में हैसियत कुछ ही देशों पर थी। इनमें ईरान, म्यांमार, और सूडान जैसे छिट-पुट देश शामिल थे। लेकिन साल 2000 के बाद जब चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित होने लगी, तो उसका वैश्विक प्रभाव भी बढ़ता गया।
अध्ययन रिपोर्ट के लेखकों में एक जोनाथन मोयर ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा- ‘अब दुनिया पर प्रभाव जिस रूप में मौजूद रहता है, वह मुख्य रूप से सैनिक प्रभाव पर केंद्रित नहीं रहता, हालांकि यह आज भी महत्वपूर्ण है।’ अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक चीन के प्रभाव का कारण वैश्विक व्यापार के केंद्र के रूप में उसकी हैसियत है। मोयर के मुताबिक हाल के वर्षों में चीन के इस प्रभाव की वृद्धि दर में कमी आई है, लेकिन अब वह हथियारों की बिक्री करके इस गति को फिर बढ़ा सकता है।
अध्ययनकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अमेरिका ने अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में संरक्षणवाद की नीति अपना कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खुद को कमजोर कर लिया है। एक दूसरे अध्ययनकर्ता मैथ्यू बरॉज ने ध्यान दिलाया है कि अमेरिका ने अपने को बड़े क्षेत्रीय व्यापार समझौतों से बाहर कर लिया है। इससे पलड़ा चीन की तरफ झुक गया है।
अध्ययन रिपोर्ट के इंडेक्स के मुताबिक अमेरिका अब लगभग 50 देश में सर्वाधिक प्रभावशाली शक्ति है। चीन की ये हैसियत 34 देशों में है। चीन के प्रभाव क्षेत्र में पूरा लैटिन अमेरिका और जापान, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसी आर्थिक ताकतें भी हैं। जहां तक यूरोपीय देशों का सवाल है, तो उनके बीच जर्मनी सबसे अधिक प्रभावशाली देश है। पश्चिमी और मध्य यूरोप में उसका सबसे ज्यादा असर है। फ्रांस कई अफ्रीकी देशों में सबसे प्रभावशाली की हैसियत में है। ब्रिटेन की ये हैसियत अब सिर्फ आयरलैंड में बच गई है।