कोरोना पर जल्द से जल्द से काबू पाने और उसकी रोकथाम को लेकर निर्णायक फैसले लेने के लिए दुनिया के कई क्षेत्रों में लगातार शोध हो रहे हैं। हर शोध में कोरोना वायरस को लेकर अलग-अलग खुलासे होते हैं। ऐसा ही एक खुलासा यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने किया है।
शोधकर्ताओं की ओर से की गई रिसर्च में बताया गया है कि दिल की बीमारी से बचने के लिए एस्पिरिन लेने वाले कोरोना मरीजों में मौत का जोखिम बहुत कम होता है। अध्ययन में कहा गया है कि अस्पताल में भर्ती ऐसे कोरोना मरीज जो दिल की बीमारी से बचाव के लिए एस्पिरिन दवा खा रहे थे, उन्हें आईसीयू में रखने की जरूरत काफी कम पड़ी।
यह शोध एनेस्थीसिया और एनाल्जेसिया जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध में जानकारी दी गई है कि एस्पिरिन किफायती और आसानी से मिलने वाली दवा है, जो कोरोना की गंभीर दिक्कतों को रोकने में मदद कर सकता है। यूएमएसओएम में एनेस्थिसियोलॉजी के सहायक प्रोफेसर जोनाथन चाउ ने इस अध्ययन को महत्वपूर्ण खोज बताया है।
शोध के लिए डॉक्टर चाउ और उनके सहयोगियों ने औसतन 55 साल की आयु के 412 कोरोना रोगियों के मेडिकल रिकॉर्ड का अध्ययन किया है। इन्हें पिछले कुछ महीनों के दौरान अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इन मरीजों में से लगभग एक चौथाई मरीज दिल की बीमारी से बचने के लिए एस्पिरिन ले रहे थे।
डॉक्टर चाउ ने बताया कि एस्पिरिन के इस्तेमाल से मैकेनिकल वेंटीलेटर पर रखे जाने के जोखिम को 44 फीसदी तक कम किया जा सकता है।