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ईशनिंदा का आरोप झेल रही आसिया बीबी ने पाकिस्तान छोड़ा, कनाडा पहुंचीं

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Wed, 08 May 2019 02:27 PM IST
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आसिया बीबी - फोटो : अमर उजाला

पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा पाने वाली ईसाई महिला आसिया बीबी अब अपना देश को छोड़ चुकी हैं। आसिया अब कनाडा पहुंच गई हैं। आसिया बीबी ने पाकिस्तान की जेल में आठ साल बिताए थे। बीते साल 31 अक्तूबर को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।

रिहाई का हुआ था विरोध

आसिया की रिहाई के बाद देशभर में हंगामा हुआ था। लोगों ने सरकार, कोर्ट और सेना के खिलाफ नारेबाजी तक की और लाखों लोग सड़कों पर उतर आए थे। 

एक महिला को रिहा करने के कारण हालात इतने खराब हुए थे कि सुप्रीम कोर्ट के जजों पर भी गलत टिप्पणियां की गईं। उन्हें कहा गया कि वह सच्चे मुसलमान ही नहीं हैं। जिसके बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने वीडियो जारी कर लोगों को समझाने की कोशिश की।



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उन्होंने कहा था कि फैसला इस्लामी कानून के तहत ही लिया गया है और उसे सभी लोगों को स्वीकार भी करना चाहिए। साथ ही उन्होंने हिंसा फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की भी चेतावनी दी थी।

क्या है मामला? 

कहानी 14 जून, 2009 से शुरू होती है। आसिया बीबी का तीन मुस्लिम महिलाओं से विवाद हो गया था। वह लाहौर के शेखपुरा स्थित अपने खेतों में काम कर रही थीं। तेज घूप में काम करने के कारण उन्हें प्यास लगी और उन्होंने कुंए के पास मुस्लिम महिलाओं के लिए रखे पानी के गिलास से पानी पी लिया। मुस्लिम महिलाओं ने इस बात का काफी विरोध किया।

इसके कुछ दिनों बाद मुस्लिम महिलाओं ने विरोध दर्ज कराया कि आसिया ने ईसा मसीह और पैगंबर महोम्मद की तुलना की है। उन्होंने आसिया पर ईश निंदा के तहत मामला भी दर्ज करा दिया। इसके बाद पाकिस्तान पेनल कोर्ट की धारा 295-सी के तहत आसिया को गिरफ्तार किया गया। इस कानून के  तहत आरोपी को मौत की सजा सुनाई जाती है।

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आसिया बीबी - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा पाने वाली ईसाई महिला आसिया बीबी अब अपना देश को छोड़ चुकी हैं। आसिया अब कनाडा पहुंच गई हैं। आसिया बीबी ने पाकिस्तान की जेल में आठ साल बिताए थे। बीते साल 31 अक्तूबर को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था।

रिहाई का हुआ था विरोध

आसिया की रिहाई के बाद देशभर में हंगामा हुआ था। लोगों ने सरकार, कोर्ट और सेना के खिलाफ नारेबाजी तक की और लाखों लोग सड़कों पर उतर आए थे। 

एक महिला को रिहा करने के कारण हालात इतने खराब हुए थे कि सुप्रीम कोर्ट के जजों पर भी गलत टिप्पणियां की गईं। उन्हें कहा गया कि वह सच्चे मुसलमान ही नहीं हैं। जिसके बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने वीडियो जारी कर लोगों को समझाने की कोशिश की।

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उन्होंने कहा था कि फैसला इस्लामी कानून के तहत ही लिया गया है और उसे सभी लोगों को स्वीकार भी करना चाहिए। साथ ही उन्होंने हिंसा फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की भी चेतावनी दी थी।

क्या है मामला? 

कहानी 14 जून, 2009 से शुरू होती है। आसिया बीबी का तीन मुस्लिम महिलाओं से विवाद हो गया था। वह लाहौर के शेखपुरा स्थित अपने खेतों में काम कर रही थीं। तेज घूप में काम करने के कारण उन्हें प्यास लगी और उन्होंने कुंए के पास मुस्लिम महिलाओं के लिए रखे पानी के गिलास से पानी पी लिया। मुस्लिम महिलाओं ने इस बात का काफी विरोध किया।

इसके कुछ दिनों बाद मुस्लिम महिलाओं ने विरोध दर्ज कराया कि आसिया ने ईसा मसीह और पैगंबर महोम्मद की तुलना की है। उन्होंने आसिया पर ईश निंदा के तहत मामला भी दर्ज करा दिया। इसके बाद पाकिस्तान पेनल कोर्ट की धारा 295-सी के तहत आसिया को गिरफ्तार किया गया। इस कानून के  तहत आरोपी को मौत की सजा सुनाई जाती है।

आसिया बीबी - फोटो : File Photo

कब क्या हुआ?

8 नवंबर, 2010

आसिया बीबी को शेखपुरा की अदालत में पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी करने का दोषी पाया गया और मौत की सजा सुना दी गई।

17 नवंबर, 2010

पोप बेनेडिक्ट XVI ने आसिया की रिहाई की मांग की और कहा कि पाकिस्तान में ईसाई भेदभाव का शिकार होते हैं।

4 जनवरी, 2011

पंजाब के राज्यपाल सलमान ताहीर की पुलिस बॉडीगार्ड ने हत्या कर दी क्योंकि वह जेल में आसिया से मिलने गए थे। बॉडीगार्ड ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से कहा कि आसिया मौत की हकदार है। आसिया की रिहाई के लिए ताहीर द्वारा दायर याचिका के बाद जरदारी ने केस की समीक्षा करने को कहा।

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2 मार्च, 2011

पाकिस्तान के अकेले अल्पसंख्यक मंत्री शाहबाज की हत्या कर दी गई। उनकी हत्या इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने निंदा के कानूनों में बदलाव के लिए अभियान चलाया था।

16 अक्तूबर, 2014

लाहौर हाई कोर्ट ने आसिया बीबी की दोषसिद्धि को सही ठहराया और मृत्यु दंड को मंजूरी दे दी।

22 जुलाई, 2015

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मृत्यु दंड की सजा को तब तक के लिए निलंबित कर दिया जब तक अपील की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। मामले में आसिया के खिलाफ कुल 7 गवाह थे।

31 अक्तूबर, 2018

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए आसिया के खिलाफ सुनाए गए फैसले को खारिज किया और रिहाई का फैसला सुनाया।

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