प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार निवर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और भंग नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता राजा रियाज अहमद के बीच विचार-विमर्श के अंतिम दिन काकर के नाम पर सहमति बनी। काकर (52 वर्षीय) बलूचिस्तान के पुश्तून मूल के हैं और बलूचिस्तान अवामी पार्टी (बीएपी) के सदस्य हैं।
'डॉन' अखबार ने निवर्तमान सत्तारूढ़ गठबंधन के एक सदस्य के हवाले से कहा, 'काकर का नाम कहीं और से आया है और इसे सभी हितधारकों को स्वीकार करना पड़ा। राजनेता स्पष्ट रूप से शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान का जिक्र कर रहे थे।' गठबंधन में कई लोगों के लिए काकर का नाम हैरान करने वाला था। एक सवाल के जवाब में नेता ने कहा, 'यहां तक कि जिन लोगों ने काकर के नामांकन के सारांश पर हस्ताक्षर किए थे, उन्हें भी काकर के नाम के बारे में जानकारी नहीं थी।'
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता सैयद खुर्शीद शाह ने स्वीकार किया कि किसी को नहीं पता था कि काकर कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा कि पीपीपी ने तीन नाम प्रस्तावित किए थे और वे बेहतर विकल्प थे। उन्होंने कहा, 'हमें सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद करनी चाहिए, भले ही यह नाम (काकर का) कहां से आया हो।' हालांकि, विपक्ष के नेता रियाज ने संवाददाताओं से कहा, 'मैंने यह नाम दिया था और प्रधानमंत्री ने इस नाम पर सहमति जताई है।'
रियाज ने कहा कि उनके और शरीफ के बीच यह तय हुआ है कि वे अन्य नामों का खुलासा नहीं करेंगे जिन पर विचार किया जा रहा है। दोनों पक्ष पहले ही इच्छा जता चुके थे कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री छोटे प्रांत से होना चाहिए। बीएपी के सीनेटर अब्दुल कादिर ने कहा कि उनकी पार्टी पिछले कुछ दिनों से काकर को कार्यवाहक प्रधानमंत्री पद के लिए नामित करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि सीनेट के अध्यक्ष सादिक संजरानी काकर के लिए लॉबिंग कर रहे थे और उन्होंने पिछले कुछ दिनों में शरीफ, विपक्षी नेता रियाज, पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान और पीएमएल-एन के अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी। कार्यवाहक प्रधानमंत्री को नामित करने में देरी इसलिए हुई क्योंकि रियाज, जिन्हें आमतौर पर एक 'दोस्ताना विपक्षी नेता' माना जाता है, एक अलग व्यक्ति के रूप में सामने आए, क्योंकि वह पीएमएल-एन द्वारा सुझाए गए नामों पर सहमत होने के बजाय अपने उम्मीदवार पर जोर दे रहे थे।
संविधान के अनुच्छेद 224 (1ए) के प्रावधान के तहत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता के परामर्श से कार्यवाहक प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है। काकर 2018 में सीनेट के लिए चुने गए थे और एक बहुत सक्रिय राजनेता रहे हैं। उन्होंने ऊपरी सदन के लिए अपने चुनाव से पहले बलूचिस्तान प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता के रूप में भी कार्य किया। उनका जन्म 1971 में बलूचिस्तान के सैफुल्ला जिले के किला के मुस्लिम बाग इलाके में हुआ था। उन्होंने राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की है और बलूचिस्तान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं।
काकर ने ऐसे समय में कार्यभार संभाल रहे हैं जब पाकिस्तान 1947 में आजादी के बाद से अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही वित्तीय कुप्रबंधन और राजनीतिक अनिश्चितता के कारण संकट का सामना कर रही थी। वैश्विक ऊर्जा संकट और पिछले साल देश में आई विनाशकारी बाढ़ ने देश की इस चिंता को और बढ़ा दिया है।