अमेरिका और चीन में जारी तनाव के बीच दोनों देशों में औपचारिक रूप से व्यापार वार्ता शुरू होने को यहां बेहद अहम समझा जा रहा है। पर्यवेक्षकों ने इसे इस बात का संकेत माना है कि दोनों देश आर्थिक नीति के मामले में तालमेल बनाने की जरूरत महसूस कर रहे हैं। दोनों देशों ने इस बातचीत को कितनी अहमियत दी यह इससे ही जाहिर है कि उनके सर्वोच्च आर्थिक अधिकारी इसमें शामिल हुए। आर्थिक मामलों के चीनी प्रभारी लिउ हे की पहले मंगलवार को अमेरिका की वित्त मंत्री जेनेट येलेन से वर्चुअल बातचीत हुई। फिर बुधवार को उनकी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन टाई से बातचीत हुई।
चीन की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक इन वार्ताओं के दौरान दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि उनके बीच का आर्थिक संबंध ‘बहुत महत्वपूर्ण’ है। बातचीत के दौरान कुल आर्थिक स्थिति के साथ-साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग पर “समानता और पारस्परिक सम्मान की भावना” के साथ बात करने पर सहमति बनी। चीन के बयान के मुताबिक दोनों देशों की जो चिंताएं हैं, उनकी उन्होंने बेलाग ढंग से चर्चा की। अमेरिकी बयान में कहा गया कि जेनेट येलेन ने अमेरिकी हित से जुड़े मुद्दों पर सहयोग के बारे में बात की। साथ ही उन्होंने अमेरिका में अर्थव्यवस्था को सुधारने की योजना पर चर्चा की। हालांकि बयान में यह भी कहा गया कि “चिंता के मुद्दों” पर भी खुल कर बात हुई।
विश्लेषकों ने कहा है कि अमेरिका में चीन के साथ नरमी दिखाना एक संवेदनशील मुद्दा है। इसलिए जो बाइडन प्रशासन के लिए यह मजबूरी बनी हुई है कि चीन से हर संपर्क की व्याख्या वह अमेरिकी फायदे का जिक्र करते हुए करे। यही बात ताजा वार्ता के बारे में जारी अमेरिकी बयान में भी जाहिर हुई है। लेकिन चीन में इस अहम माना गया है कि दोनों देशों ने बातचीत की जरूरत महसूस की है। चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कॉन्टेपॉरेरी इंटरनेशनल रिलेशंस में वरिष्ठ शोधकर्ता चेन फेंगयिंग ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि दोनों देश अब कुछ कठिन मसलों पर बातचीत करने की दिशा में आगे बढ़े हैं। अगली वार्ताओं में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग प्रमुख मसला होगा।
चीनी मीडिया में ये ध्यान दिलाया गया है कि दोनों पक्षों ने अनुभवी और अहम शख्सियतों को इस वार्ता की जिम्मेदारी दी है। लिउ हे लंबे समय से चीन में आर्थिक नियोजन से जुड़े रहे हैं। 2021-25 की पंचवर्षीय विकास योजना बनाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। अभी चीनी अर्थव्यवस्था का प्रबंधन, आविष्कार योजनाओं पर अमल, पब्लिक सेक्टर के उद्योगों में सुधार आदि जैसे बड़े कार्यों का भार लिऊ संभाल रहे हैं। दूसरी तरफ येलेन के पास अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभालने का लंबा अनुभव है। येलेन इस वक्त अमेरिका में रोजगार और पारिवारिक सहायता से संबंधित योजनाओं को कार्यरूप देने में जुटी हुई हैं।
सेंटर फॉर चाइना एंड ग्लोबलाइजेशन में वरिष्ठ अनुसंधानकर्ता हे वेइवेन ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि ऐसी वार्ताओं से आम तौर पर सकारात्मक माहौल बनता है। इससे द्विपक्षीय वार्ता शुरू करने की जमीन तैयार होती है। लेकिन उन्होंने आगाह किया कि जो बाइडंन प्रशासन चीन को घेरने की रणनीतिक और राजनीतिक कोशिशें जारी रखे हुए हैं। ये बात द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने में बाधक बन सकती है। हे ने कहा- ‘अगर यह मुद्दा हल नहीं होता, तो आर्थिक वार्ताओं में स्थिर गति से प्रगति नहीं हो पाएगी। प्रगति की शर्त यह है कि अमेरिका चीन को घेरने के बजाय सहयोग की नीति पर चलना शुरू करे।’