कोरोना वायरस महामारी से बदली जीवन शैली के बीच अब कंप्यूटर/मोबाइल गेमिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग में सबसे बड़ा मीडिया और मनोरंजन उद्योग बन गए हैं। ये बात बहुराष्ट्रीय प्रोफेशनल एजेंसी प्राइसवाटरहाउसकूपर (पीडब्ल्यूसी) की एक स्टडी से सामने आई है। उसकी ताजा अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि इन दोनों सेक्टर में ग्रोथ की संभावना पहले से थी, लेकिन कोरोना महामारी ने इसकी गति तेज कर दी। इसका नतीजा यह हुआ है कि दुनिया की कई बड़ी मीडिया कंपनियां अब अपने कारोबार में कंप्यूटर गेम्स और वीडियो स्ट्रीमिंग को तरजीह दे रही हैं।
कोराबार जगत की हालिया घटनाओं से संकेत मिला है कि अब इन दोनों क्षेत्रों में तीखी प्रतिस्पर्धा की स्थिति बन रही है। हाल में हुए डिस्कवरी और वॉर्नर मीडिया करार को इसी का संकेत समझा जा रहा है। विश्लेषकों ने कहा है कि इन क्षेत्रों में अब बड़ी कंपनियां उतर रही हैं, इसलिए छोटी कंपनियों के अधिग्रहण और बड़ी कंपनियों में आपसी तालमेल की संभावनाएं तेजी से खुल रही हैं।
गौरतलब है कि डिस्कवरी और वॉर्नर मीडिया के बीच हुए करार से पहले अमेजन ने एमजीएम स्टूडियो को खरीदने का एलान किया था। उसके पहले एमजीएम अमेरिका में स्वतंत्र रूप से फिल्में बनाने वाला एकमात्र स्टूडियो बचा था। इस बीच ये चर्चा तेज है कि एएमसी नेटवर्क्स और लायनगेट को भी अमेजन खरीदने वाली है। अफवाहें अमेजन और कॉमकास्ट के एनबीसीयू और वायाकॉम सीबीएस के बीच सौदेबाजी की भी हैं। बताया जाता है कि अमेजन गेमिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग के क्षेत्रों में सबसे कंपनी बनने की रणनीति पर चल रही है।
इस बीच ये चर्चा भी है कि नेटफ्लिक्स ने अपने यहां एक गेमिंग चीफ की नियुक्ति करने का फैसला किया है। नेटफ्लिक्स कंपनी आने वाले दिनों में गेमिंग के क्षेत्र में अपना दखल बढ़ाना चाहती है। खासकर उसका ध्यान मोबाइल गेमिंग क्षेत्र पर है। कारोबार जगत से मिली रिपोर्टों के मुताबिक गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एपल और अमेजन कंपनियों ने क्लाउड गेमिंग में निवेश में भारी बढ़ोतरी की है। ये कंपनियां भविष्य में गेमिंग सब्सक्रिप्शन के जरिए अधिक कमाई करने की रणनीति पर चल रही हैं।
लेकिन वेबसाइट एक्सियोस.कॉम के एक विश्लेषण में बताया गया है कि माइक्रोसॉफ्ट कंपनी अपनी उम्मीद के मुताबिक गेमिंग सेक्टर में अब तक कामयाबी हासिल नहीं कर पाई है। लेकिन इन तमाम कंपनियों की पहल से ये साफ संकेत मिला है कि गेमिंग सेक्टर में तेज ग्रोथ हो रही है। इससे होने वाली आमदनी आने वाले दिनों में पे-टीवी सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई से ज्यादा हो जाएगी। पे-टीवी का मतलब सब्सक्रिप्शन के आधार पर दी जाने वाली केबल, सैटेलाइट या लाइव डिजिटल टीवी सेवाओं से है।
जानकारों के मुताबिक अमेरिका में पे-टीवी को अब मरता हुआ उद्योग समझा जाता है। ब्रॉडबैंड की आसान उपलब्धता के बाद ज्यादा से ज्यादा लोग वीडियो कंटेंट मोबाइल फोन या लैपटॉप पर देख रहे हैं। लंबे समय तक डिज्नी, वायाकॉम सीबीएस, कॉमकास्ट-एनबीसीयू जैसी कंपनियों ने सबसे ज्यादा राजस्व पे-टीवी से कमाया। लेकिन हाल के वर्षों में उनकी आमदनी घटती गई है। इसलिए ये कंपनियां अब वीडियो स्ट्रीमिंग और गेमिंग सेक्टर में निवेश बढ़ा रही हैं।
पीडब्ल्यूसी के ताजा अध्ययन के मुताबिक जिन दो और क्षेत्रों में ग्रोथ देखा गई है, वे ई-स्पोर्ट्स और डिजिटल ऑडियो हैं। लेकिन ये अभी अपेक्षाकृत नए क्षेत्र हैं। पीडब्लूसी ने बताया है कि प्रिंट माध्यम और सिनेमा में ग्रोथ काफी धीमा हो गई है।