रूस और यूक्रेन के बीच तुर्की के इस्तांबुल में अहम वार्ता जारी है। अगर यह बातचीत सफल होती है तो पूरी दुनिया को महंगाई की समस्या से राहत मिल सकती है। दरअसल, दोनों ही देशों के राजनयिक संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और तुर्की के अफसरों की मौजूदगी में अनाज निर्यात पर लगे प्रतिबंधों पर चर्चा कर रहे हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अनाज के मुद्दे पर चर्चा जारी है और बातचीत सैन्य अफसरों के जरिए की जा रही है।
गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच इस साल फरवरी से ही युद्ध जारी है। रूस ने यूक्रेन के कई अहम ठिकानों पर कब्जा कर लिया है। इनमें काला सागर (ब्लैक सी) से जुड़े कई अहम ठिकाने शामिल हैं। इसके अलावा यूक्रेन के कई अहम बंदरगाहों पर भी रूस ने या तो कब्जा कर लिया है या उसकी ओर से हमले जारी हैं। ऐसे में यूक्रेन की तरफ से अनाज के निर्यात पर करीब पांच महीनों से रोक लगी है। इसी गतिरोध को खत्म करने के लिए यूएन और तुर्की ने रूस-यूक्रेन के बीच बातचीत शुरू कराने पर जोर दिया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध
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कैसे पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है रूस-यूक्रेन संकट?
रूस की वजह से जो गतिरोध पैदा हुआ है, उसके चलते पूरी दुनिया में खाद्य सामग्रियों की महंगाई दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (एफएओ) का फूड प्राइस इंडेक्स, जो कि पूरी दुनिया में खाद्य सामग्रियों की कीमतों को ट्रैक करता है, मार्च में ही अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। यह ट्रैकर 1990 में ही शुरू हुआ था। यानी पूरे 32 वर्षों में खाद्य सामग्रियों के दाम सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किए गए थे।
महंगाई बढ़ने की संभावना।
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रूस-यूक्रेन की वजह से क्यों वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे खाद्य सामग्रियों के दाम?
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से ही कीव की ओर से निर्यात में बड़ा गतिरोध आया है। उधर रूस पर भी पश्चिमी देशों ने जबरदस्त प्रतिबंध लगाए हैं। नतीजतन यूक्रेन के साथ रूस से निर्यात में भी कमी आई है। ज्यादातर देश रूस से सीधी खरीद करने से बच रहे हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थों की महंगाई सबसे ऊंचे स्तर पर है।
यह दोनों ही देश अनाज निर्यात के मामले में पावरहाउस हैं। इन्हीं दोनों देशों से दुनिया की गेहूं की 24 फीसदी जरूरते पूरी होती हैं। इतना ही नहीं दुनिया की 57 फीसदी सुरजमुखी के तेल की जरूरत भी रूस-यूक्रेन ही पूरी करते हैं। यूएन कॉमट्रेड के मुताबिक, 2016 से 2020 तक यह दोनों देश दुनिया की 14 फीसदी भुट्टे के निर्यात के लिए भी जिम्मेदार थे। लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद से ही रूस-यूक्रेन निर्यात में बुरी तरह पिछड़ गए हैं और कई देशों में इन खाद्य सामग्रियों की कमी पैदा हो गई है।
नाटो के तकनीकी सहयोग कार्यक्रम में यूक्रेन शामिल
कीव। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेनी रक्षामंत्री ने कहा है कि उनका देश बहुपक्षीय इंटरऑपरेबिलिटी प्रोग्राम का सहयोगी सदस्य बन गया है। यह नाटो सदस्य देशों की सेनाओं के तकनीकी सहयोग का ध्यान रखता है। इस तरह, नाटो देशों ने यूक्रेन की मजबूत आईटी क्षमता को स्वीकार किया है। यूक्रेन के रक्षामंत्री ओलेक्सी रेजनिकोव ने कहा, मुझे भरोसा है कि हम सामूहिक सुरक्षा के विकास में अपनी बेहतर भूमिका निभाएंगे।