उन्होंने कहा कि कोरोना का नया म्यूटेंट B1617 भारत के अलावा 40 अन्य देशों में पाया गया है, इसमें अमेरिका भी शामिल है। कोरोना काल के इस संकट में अमीर देशों की जिम्मेदारी बन जाती है कि वो अक्षम देशों की मदद करें। बता दें कि अगले हफ्ते से रूस की वैक्सीन स्पूतनिक वी को भी टीकाकरण अभियान में शामिल किया जाएगा।
स्पूतनिक वी पर डॉ. फाउची ने रखी अपनी राय
वहीं स्पूतनिक वी की प्रभावकारित पर डॉ. फाउची ने कहा कि भारत बायोटेक की ओर से बनी कोवैक्सीन को लेकर मेरे पास कुछ ज्यादा सूचना नहीं है लेकिन स्पूतनिक वी ज्यादा असरदार है। स्पूतनिक वी कोरोना के खिलाफ 90 फीसदी प्रभावी है। हालांकि कोवैक्सीन पर उन्होंने कहा कि इस पर उनके पास ज्यादा जानकारी नहीं है।
12-18 हफ्ते के अंतर को बताया जायज
इसके अलावा डॉ. फाउची ने यह भी कहा कि अगर वैक्सीन की कमी है तो टीके की पहली खुराक और दूसरी खुराक के बीच 12-18 हफ्ते का अंतर रखने का फैसला जायज है। ताकि कम से कम ज्यादा से ज्यादा लोगों को कोरोना की पहली खुराक तो लग जाए। डॉ. फाउची ने इस पर कहा कि आप दोनों डोज के बीच लंबा अंतर करते हैं तो इसकी संभावना काफी कम है कि यह टीका की प्रभावकारिता पर नकारात्मक असर डालेगा।