अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया में सैन बर्नारडिनो में हुई गोलीबारी में 14 लोगों की मौत की घटना का कई पाकिस्तानी उर्दू अखबारों ने अलग-अलग कोणों से विश्लेषण किया है। 'रोजनामा एक्सप्रेस' लिखता है कि अमेरिका में होने वाले इस हमले से पता चलता है कि दहशतगर्दी की जंग अब एशिया से निकल कर यूरोप और अमेरिका तक तेजी से फैल रही है और आने वाले दिनों में विकसित देशों को और चरमपंथी घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है।
इस सिलसिले में पेरिस हमलों का जिक्र करते हुए अखबार लिखता है कि जिन विकसित देशों को अब तक सुरक्षित समझा जाता था, वो भी असुरक्षित हो रहे हैं। अखबार लिखता है कि पश्चिमी देशों के पास आधुनिक हथियार, तकनीक और प्रशिक्षित सैनिक हैं, लेकिन जब तक दहशतगर्दी को बढ़ावा देने वाले कारण मौजूद बने रहेंगे, इसका खात्मा मुमकिन नहीं है।
ओबामा अमेरिका में 'गन कल्चर' को नियंत्रित करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त समर्थन नहीं मिलता है 'रोजनामा पाकिस्तान' ने लिखा है कि अमेरिका में होने वाली वारदात की कड़ी निंदा होनी चाहिए क्योंकि किसी को भी दूसरे लोगों का खून बहाने का लाइसेंस नहीं दिया जा सकता। लेकिन अखबार की ये भी टिप्पणी है कि अमेरिका अक्सर दहशतगर्दी के अड्डे पाकिस्तान में होने के आरोप लगाता है, लेकिन अब उसके एक अहम राज्य में हमले के बाद क्या ये नहीं कहना चाहिए अमेरिका में भी दहशतगर्दी के अड्डे हैं?
पेरिस में आईएस हमलों में 130 लोगों की मौत
अखबार लिखता है कि अगर अमेरिका जैसे विकसित देश में ऐसी घटनाएं हो सकती हैं तो फिर पाकिस्तान पर ही इल्जाम क्यों? वहीं 'नवा-ए-वक्त' लिखता है कि अमेरिका और यूरोप में इस तरह गोलीबारी की घटनाएं होती रही हैं जिनमें दर्जनों लोग गैर-मुस्लिम सनकी लोगों का निशाना बने हैं। अखबार लिखता है कि कभी ऐसी घटनाओं को धर्म से नहीं जोड़ा गया लेकिन जब ऐसी घटना में किसी मुसलमान का नाम आता है तो फिर मुसलमानों पर दोषारोपण होने लगता है।
अखबार का कहना है कि पेरिस हमलों के बाद फ्रांस में रहने वाले मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। उधर पेरिस में भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों की बैठक पर रोजनामा 'वक्त' ने लिखा है कि मुलाकात के लिए नरेंद्र मोदी खुद चल कर नवाज शरीफ के पास आए जिस पर सबको हैरानी हुई।
अखबार लिखता है कि प्रधानमंत्री मोदी का खुद चल कर आना, एक ही सोफे पर बैठ कर सरगोशियां करना और मुस्कराहट बिखेरना सकारात्मक माहौल का संकेत देता है, लेकिन भारत की हठधर्मिता और आक्रामक रवैये में तब्दीली आना आसान नहीं है। अखबार की टिप्पणी है कि भारत इस बात को समझे कि उसकी मौजूदा नीतियां उपमहाद्वीप में शांति नहीं, बल्कि जंग को दावत दे रही हैं और जंग से मसले सुझलते नहीं, बल्कि उलझते हैं।
पीएम मोदी की कम हुई लोकप्रियता
उधर 'औसाफ' ने हाल में ग्रीस से 49 गैरकानूनी प्रवासियों को पाकिस्तान डिपोर्ट किए जाने पर संपादकीय लिखा है। अखबार लिखता है कि 19 लोगों की पहचान पाकिस्तानी नागिरक के तौर पर हुई तो उन्हें उतारकर बाकी 30 को उसी विमान से वापस ग्रीस भेज दिया गया क्योंकि उनकी नागरिकता की पहचान नहीं हो पाई। अखबार ने प्रवासियों को वापस भेजने के सरकार के फैसले को एक दिलेर फैसला बताया है।
रूख भारत का करें तो 'हिंदोस्तान एक्सप्रेस' का संपादकीय है- गुजरात में बीजेपी को झटका। अखबार कहता है कि बिहार के बाद बीजेपी को गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों में जोर का झटका लगा है। अखबार की टिप्पणी है कि शहरी इलाकों के नगर निगमों में बीजेपी ने कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया, लेकिन देहाती इलाकों में जिस तरह कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है, उससे राज्य में बीजेपी के लिए खतरे की घंटी बज गई है।
वहीं, पीएम मोदी के चुनाव क्षेत्र रहे मेहसाणा में भी बीजेपी की हार का जिक्र करते हुए अखबार लिखता है कि मोदी की चमक फीकी पड़ने लगी है। अखबार के मुताबिक 2017 में राज्य विधानसभा के चुनाव से पहले ये आखिरी बड़ा चुनाव था। 'हमारा समाज' ने चेन्नई में भारी बारिश और बाढ़ के हालात पर संपादकीय लिखा है। अखबार लिखता है कि अब भी हजारों लोग अपने मकानों में सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं। लोगों को दवाओं की जरूरत नहीं है, लेकिन राहत कार्यों में इजाफा करें ताकि फंसे लोगों को जल्द से जल्द निकाला जा सके।