दिग्गज जर्मन कार निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन हर्जाना चुकाने वाले समझौते पर तैयार हो गई है। आप को बता दें कि प्रदूषण मानकों में हेरफेर के विवाद में फंसी फॉक्सवैगन 14.7 बिलियन डॉलर (करीब एक लाख करोड़ रुपए) का हर्जाना भरेगी।
अमेरिकी मीडिया के मुताबिक यह हर्जाना उसे अपने ग्राहकों और सरकारी एजेंसियों को देना होगा। आप को बता दें कि पिछले साल सितम्बर में फॉक्सवैगन का 'इमीशन स्कैंडल' सामने आया था। इस स्कैंडल के सामने आने के बाद कंपनी ने मान लिया था कि दुनियाभर में एक करोड़ से ज्यादा गाड़ियों में एक ऐसा सॉफ्टवेयर लगा हुआ है जो प्रदूषण जांच के दौरान गाड़ी से निकल रही नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा को 40 गुना कम करके दिखाता है।
अमेरिकी मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस समझौते के अनुसार, ग्राहकों के पास दो विकल्प होंगे। इसमें पहला तो यह कि या तो वह अपनी कार वापस कर दे या फिर उसे रिपेयर करने के लिए वापस कंपनी को दे दे।
लेकिन ग्राहकों के लिए एक फायदे की बात यह है कि इन दोनों ही विकल्पों में कंपनी को उन्हें पांच से दस हजार डॉलर के बीच मुआवजा देना होगा। साथ ही गाड़ी वापस करने की स्थिति में उसे सितम्बर 2015 की कीमत के हिसाब से गाड़ी की रकम वापस देनी होगी।
बताया जाता है कि ऐसा करने में कंपनी के 10 बिलियन डॉलर खर्च होंगे। लेकिन इसके बाद भी फॉक्सवैगन को राहत नहीं मिल सकती है। क्योंकि अगर कार मालिक चाहें तो वह फॉक्सवैगन के खिलाफ मुकदमा कर सकते हैं। अनुमान के मुताबिक प्रभावित कारों की संख्या लगभग 5,00,00 के करीब है।