अमेरिका में अप्रवासियों को लेकर भले ही बुरी छवि बनाई जा रही है लेकिन छह नवंबर को मध्यावधि चुनावों में भारतीय मूल के करीब 100 अमेरिकी उम्मीदवार मैदान में मजबूत दावेदार के तौर पर उतर चुके हैं। वैसे तो चुनाव में सभी की निगाहें तथाकथित ‘समोसा कॉकस’ पर होंगी लेकिन युवा भारतवंशी उम्मीदवारों का इतनी संख्या में उभरना उनकी बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। मौजूदा अमेरिकी कांग्रेस में ‘समोसा कॉकस’ पांच भारतीय-अमेरिकियों के समूह को कहा जाता है।
अमेरिका की जनसंख्या में भारतीय मूल के अमेरिकियों की जनसंख्या एक प्रतिशत है। भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा कि अमेरिका की राजनीति में भारतीय-अमेरिकियों की संख्या बढ़ते देखना अद्भुत है। मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनावों में वर्तमान प्रतिनिधि सभा के सभी चार भारतवंशी सदस्यों के आसान जीत दर्ज करने की उम्मीद जताई जा रही है।
इन मध्यावधि चुनावों में तीन बार के अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य एमी बेरा और पहली बार प्रतिनिधि सभा के लिए चुनकर आए तीन सदस्य शामिल हैं जो दोबारा निर्वाचन के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इन चार मौजूदा सदस्यों के साथ-साथ सात भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में चुनकर आने के लिए चुनाव मैदान में कूदे हैं।
सफल उद्यमी शिव अय्यादुरई एकमात्र भारतवंशी हैं जो सीनेट के लिए लड़ रहे हैं। निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ रहे अय्यादुरई का मुकाबला मजबूत दावेदार एलिजाबेथ वॉरेन से है। मध्यावधि चुनाव में केवल यही भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार मैदान में नहीं हैं बल्कि अनाधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक करीब 100 भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।