रोबोटिक हथियारों के दौर में अमेरिका एक और अहम मुकाम की तरफ बढ़ रहा है। तालिबान के खिलाफ अमेरिकी सेना के सबसे कारगर हथियार साबित हुए ड्रोन की एकदम नई और अत्याधुनिक खेप तैयार हो रही है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने इस परियोजना में भारी निवेश किया है। शोधकर्ता ऐसे ड्रोन की खेप तैयार करने में जुटे हुए हैं जिन्हें जल, जमीन और हवा में तैनात किया जा सकेगा और ये अत्याधुनिक ड्रोन, मानव चालित मशीनों के साथ ताल मिलाते हुए क्रमबद्ध तरीके से काम कर सकेंगे।
अमेरिकी वायुसेना के चीफ वैज्ञानिक मार्क मैबरी ने बताया कि फिलहाल इस्तेमाल किए जाने वाले ड्रोन एक तरह से अंधे, बहरे और गूंगे थे। लेकिन अब हम इस तरह के ड्रोन तैयार कर रहे हैं जो देख, सुन और चीजों को महसूस कर सकते हैं। वर्तमान में मानवरहित वायुयान को पायलट सतह से नियंत्रित करते हैं। नए तरह के ड्रोन ज्यादा परिष्कृत होंगे जिनमें रिमोट ऑपरेटर्स को ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी। मैबरी ने बताया कि, हम स्वचालित तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहते हैं। नए ड्रोनों में हम खास तरह की तकनीक को शामिल कर रहे हैं, जिससे ऑपरेटर संदेशों के जरिए भी ड्रोन को दिशा या विशेष कार्य के लिए निर्देशित कर सकेंगे।
रोबोटिक हथियारों के विशेषज्ञ और वायर्ड फॉर वॉर किताब के लेखक पीटर सिंगर के मुताबिक ये कदम विकास का एक नया आयाम हैं। इस तकनीक से ऑपरेटर का रोल सुपरवाइजर या मैनेजर जैसा हो जाएगा, इनके पास ज्यादा से ज्यादा आजादी होगी। सिंगर के मुताबिक हथियारों की ये नई तकनीक विज्ञान, राजनीति और रणक्षेत्र के हिसाब से तैयार रणनीतियों के आधार पर प्रतिक्रिया देती है। ये नीति शास्त्र और न्याय अन्याय की उलझनों से कोई वास्ता नहीं है, ये आपको वहां ले जाने में सक्षम हैं जहां अभी तक वकील पहुंचने की सोच भी नही सकते।
अमेरिकी वायु सेना के पूर्व वैज्ञानिक वर्नर डैम का भी कहना है कि अगले दशक में कंप्यूटर पावर से लैस ऐसे ड्रोन की खेप तैयार होगी जो खुद से ही अपने निर्णय ले सकेगी। डैम के मुताबिक हम इस तरह के अपाचे हेलीकॉप्टर बनाने के करीब पहुंच चुके हैं जो सिर्फ एक पायलट के जरिए ही उड़ाए जा सकेंगे। इसके अलावा मानव रहित हेलीकॉप्टर सिस्टम तैयार करने के भी हम काफी करीब हैं, जो हमारे मौजूदा सिस्टम के साथ काम करने में सक्षम होगा।