भारत अमेरिका के संबंधों की हैं पैरोकार
तुलसी पिछले चार बार से सांसद है और वह भारत अमेरिका के संबंधों की समर्थक भी हैं। वे फिलहाल हाउस की ताकतवर आर्म्ड सर्विस कमेटी और विदेश मामलों की कमेटी की सदस्य हैं। वैसे तुलसी गेबार्ड मूल रूप से भारत की नहीं हैं। उनका जन्म अमेरिका के समोआ में एक कैथोलिक परिवार में हुआ था। उनकी मां कॉकेशियन हिंदू हैं। यही वजह है कि तुलसी गेबार्ड हिंदू धर्म की अनुयायी हैं।
गेबार्ड का नाम जबसे सामने आया है तभी से भारतीय मूल के लोग उनके समर्थन में सामने आ रहे हैं। अगर गेबार्ड राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी का ऐलान करती हैं तो वे किसी बड़े राजनीतिक दल की ओर से व्हाइट हाउस के लिए खड़ी होने वाली पहली हिंदू उम्मीदवार होंगी। साथ ही अगर वे चुनाव जीत जाती हैं तब वह अमेरिका में रिकॉर्ड बनाएंगी तथा अमेरिका की पहली महिला और सबसे युवा राष्ट्रपति का तमगा भी हासिल कर सकती हैं।
भगवत गीता पर ली थी सांसद पद की शपथ
हिंदु धर्म की अनुयायी तुलसी हमेशा से सुर्खियों में रही हैं। सांसद बनने के बाद तुलसी पहली सांसद थीं जिन्होंने भगवत गीता हाथ में पकड़ कर शपथ ली थी। शुक्रवार को जब कार्यक्रम में डॉक्टर शिवांगी ने तुलसी को राष्ट्रपति पद का दावेदार बताया तब देर तक बजती तालियों की गड़गड़ाहट से उनकी प्रसिद्धी का पता लगाने के लिए काफी था। डॉक्टर शिवांगी खुद एक रिपब्लिकन नेता हैं। 2012 में तुलसी जब पहली बार चुनाव के मैदान में थी तब शिवांगी ने ही उनके चुनाव लड़ने के लिए फंड जुटाया था।