ट्रंप ने उत्तर कोरिया को चेतावनी देते हुए दो विकल्प भी बताए। ट्रंप ने कहा कि उत्तर कोरिया के पास दो रास्ते हैं, पहला वह अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करके सत्ता में बने रहे। दूसरा लीबिया के नेता
मुअम्मार गद्दाफी की तरह अपनी दुर्दशा करवाए, जिन्हें साल 2011 में नाटो के समर्थन वाले विद्रोहियों ने सत्ता से बेदखल कर दिया था। ट्रंप ने कहा कि 'अगर आप गद्दाफी के मॉडल को देखें तो उसे पूरी तरह तबाह कर दिया गया था। हम वहां उन्हें हराने के लिए गए थे। यदि कोई समझौता नहीं होता तो ऐसी स्थिति में उसी मॉडल को अपनाया जा सकता है।'
वहीं ट्रंप ने कहा कि वह उत्तर कोरिया के साथ वार्ता के दौरान लीबिया मॉडल का इस्तेमाल करेंगे। जानकारी के लिए बता दें इससे पहले ट्रंप के राष्ट्रीय सलाहकार जॉन बॉल्टन ने कहा था कि प्योंगयांग के साथ वार्ता का आधार 2003-2004 का लीबिया मॉडल होगा। लेकिन ट्रंप ने कहा कि 'जब हम उत्तर कोरिया के बारे में सोचते हैं तो यह लीबिया मॉडल नहीं है। लीबिया में हमने उस देश को तबाह कर दिया था। वहां गद्दाफी को सुरक्षित रखने के लिए कोई समझौता नहीं किया गया था।'
गौरतलब है कि साल 2003 में गद्दाफी अमेरिका से आर्थिक सहायता के बदले अपने देश में सामूहिक विनाश से हथियार को समाप्त करने पर सहमत हो गया था। लेकिन समझौते में गद्दाफी को किसी भी प्रकार की सुरक्षा का भरोसा नहीं दिया गया था।