पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हुए आतंकी हमले और उसमे पाकिस्तानी आतंकियों के हाथ होने के सबूत सामने आने के बाद अमेरिका ने भी इसकी निंदा की है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसने पाकिस्तान को मदद देने से तौबा कर ली है। वह पाकिस्तानी सेना से हाल में हुई सैन्य हथियारों के आपूर्ति की डील को रद्द नहीं करेगा। हालांकि, कई सांसदों ने इसका विरोध भी किया है।
अमेरिकी कांग्रेस के कई सदस्यों ने ट्वीट के माध्यम से पाकिस्तानी आतंकियों के हमले की निंदा की है और इसका विरोध भी किया है। इसके अलावा व्हाइट हाउस की तरफ से भी हमले की निंदा की गई है लेकिन अमेरिका ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाने की बजाय उसके समर्थन ही कर रहा है। अमेरिका ने पाकिस्तानी सेना को हथियार मुहैया करने की अपनी नीति को बदलने की बजाय उसे उसी तरह हथियार उपलब्ध कराता रहेगा जैसे पहले करता था। जबकि वह पूरी तरह से वाकिफ है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने में पाकिस्तानी सेना का किस कदर योगदान है।
अमेरिकी सदन के स्पीकर पॉल रयान, सदन में बहुमत के नेता केविन मैकॉर्थी समेत कई सांसदों ने ट्वीट कर भारत पर हुए हमले की निंदा की है और इस दुःख की घड़ी में भारत के साथ होने बात कही। लेकिन वहीं दूसरी ओर नवंबर के महीने में पाकिस्तानी जनरल राहील शरीफ का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करने वाली अमेरिकी सरकार ने उसे हथियार मुहैया कराने के इनकार तक नहीं किया। पाकिस्तान में बैठे राहील शरीफ अमेरिका से मिलने वाले 8 एफ-16 विमानों के इंतजार में बैठे हैं।