फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रूस-अमेरिका में फिर शुरू हो सकती है हथियारों की होड़, संधि निलंबित

Sun, 03 Feb 2019 03:37 AM IST
गौरव द्विवेदी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
रूस-अमेरिका
विज्ञापन

अमेरिका द्वारा रूस के साथ शीतयुद्ध के समय की गई इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस (आईएनएफ) संधि से बाहर होने की घोषणा के बाद रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने भी शनिवार को समझौता निलंबित करने का एलान किया है। इसके बाद दोनों देशों के बीच हथियारों की होड़ एक बार फिर शुरू हो सकती है। इस संधि में दोनों देशों के बाहर होने से यूरोप भी रूसी मिसाइलों के खतरे की जद में आ जाएगा।  

विज्ञापन


अमेरिका ने रूस पर 2014 से इस संधि के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इससे बाहर निकलने के लिए फिलहाल छह माह का समय दिया है। इसके लिए अमेरिका ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। अमेरिका की घोषणा के ठीक बाद शनिवार को पुतिन ने रूसी विदेश और रक्षा मंत्रियों के साथ बैठक की और कहा कि रूस अब निरस्त्रीकरण पर अमेरिका के साथ वार्ता शुरू नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हम अपने साथी अमेरिका के इस अहम विषय पर सार्थक बातचीत के लिए परिपक्व होने तक इंतजार करेंगे। इसी के साथ पुतिन ने इस संधि पर अमेरिका के साथ रूस की भागीदारी को निलंबित कर दिया। 

अमेरिका द्वारा छह माह के दौरान संधि से अलग होने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद रूस के साथ उसकी मिसाइलों, लांचरों और अन्य हथियारों की होड़ शुरू होना तय है। अमेरिका के सहयोगी नाटो देशों ने ट्रंप सरकार के फैसले का समर्थन किया है। उसकी ओर से कहा गया है कि रूस लगातार यूरो-अटलांटिक सुरक्षा के लिए खतरा खड़ा कर रहा था। नाटो ने रूस से अपील की है कि वह छह महीने के समय का उपयोग करे और संधि की शर्तों को मान ले।
विज्ञापन


यूरोप ऐसे आएगा रूसी मिसाइलों की जद में

इस संधि में वैसे तो सिर्फ रूस और अमेरिका ही शामिल हैं लेकिन इसका यूरोप की सुरक्षा पर इसलिए असर पड़ेगा क्योंकि इस संधि के कारण परमाणु हथियार संपन्न 310 से 3100 मील दूरी तक की मिसाइलें दागने पर रोक थी जो अब हट जाएगी। यानी यूरोपीय देश भी अब रूसी हथियारों की जद में आ जाएंगे, जो अब तक इस संधि के कारण रूस के परमाणु मिसाइलों के खतरे से अलग थे।

चीन को मिल रहा था फायदा

अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात पर चिंता जताई है कि आईएनएफ संधि के दायरे में चीन नहीं आता है और वह अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ, रूस के साथ 1987 में हुई इस संधि के चलते अमेरिका पर कई पाबंदियां लगी हुई हैं। ऐसे में रूस के साथ समझौते के बंधन का पूरा फायदा रूस का मित्र देश चीन उठा रहा था। राष्ट्रपति ट्रंप ने कई माह पहले भी इस संधि से अलग होने के संकेत दिए थे।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें