अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पाकिस्तान को एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। ओबामा ने कहा है कि पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित होने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर सकता है और उसे ऐसा करना चाहिए।
एक इंटरव्यू में ओबामा ने कहा, 'पाकिस्तान को उसकी धरती से चल रहे आतंकी नेटवर्क को अवैध घोषित करने के साथ ही उनको पूरी तरह से नष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास दुनिया को यह दिखाने का मौका है कि वह आतंक के खिलाफ कार्रवाई करने के प्रति गंभीर है। चीन को स्पष्ट संदेश देते हुए ओबामा ने दक्षिण चीन सागर में नौसेना की स्वतंत्रता के साथ ही सभी देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि भारत एशिया प्रशांत क्षेत्र और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थायित्व का केंद्र हो सकता है। पठानकोट में एयरबेस पर आतंकी हमले को भारत की ओर से लंबे समय से झेले जा रहे 'अक्षम्य आतंकवाद की एक और मिसाल करार देते हुए ओबामा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ से मिलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों नेता इस दिशा में बातचीत को बढ़ा रहे हैं कि क्षेत्र में हिंसक चरमपंथ और आतंकवाद का मुकाबला कैसे करना है।
'भारत संग मजबूत संबंध प्राथमिकता'
भारत-अमेरिका संबंध के इस सदी की निर्णायक साझेदारी होने के अपने विश्वास को फिर से प्रकट करते हुए ओबामा ने कहा कि मोदी ने मजबूत साझेदारी के लिए अपने उत्साह को साझा किया और हमने मित्रता और निकटवर्ती कामकाजी संबंध विकसित कर लिया है।
इसमें हमारे कार्यालयों के बीच नई सुरक्षित लाइन पर हमारी बातचीत भी शामिल हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या इस संबंध ने अपनी पूर्ण क्षमता को हासिल कर लिया है तो उन्होंने कहा, 'निश्चित तौर पर नहीं। पठानकोट हमले पर उन्होंने कहा कि इस प्रकार की दुखद घटना दर्शाती है कि क्यों भारत और अमेरिका आतंकवाद से लड़ने में इतने करीबी सहयोगी हैं।
उन्होंने कहा कि मैं लगातार से यह मानता रहा हूं कि अमेरिका भारत का बेहतर सहयोगी हो सकता है। उन्होंने कहा कि मेरे राष्ट्रपति पद के कार्यकाल के अंतिम साल में भी संबंधों को मजबूत करना मेरी विदेश नीति की प्राथमिकता रहेगी।
एनजीओ को दबाना नहीं चाहिए
यह स्वीकार करते हुए कि पेरिस में जलवायु परिवर्तन पर हुआ समझौता पूरी तरह से सही और कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, ओबामा ने कहा कि आज ऐसा मेकेनिज्म तैयार करने की जरूरत है जिससे समझौते की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए सभी देश जवाबदेह हों।
जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के प्रति खुद को 'जोशीला' बताते हुए ओबामा ने कहा कि कुछ देशों को हिमालय के ग्लेशियर के पिघलने का प्रभाव भारत से ज्यादा देखने को मिलेगा। यह अप्रत्याशित मानसून और मजबूत चक्रवात के रूप में होगा। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने और स्वच्छ ऊर्जा का दोहन तेजी से भारत-अमेरिका रिश्तों का स्तंभ होगा।
कुछ गैर सरकारी संगठनों पर कार्रवाई के बाद भारत सरकार की स्पष्ट आलोचना पर ओबामा ने कहा कि आज सिविल सोसाइटी ग्रुप जो समुदाय को मजबूत कर रहे हैं उन्हें मदद की जरूरत है न की दबाव की। भारत सरकार की ओर से एनजीओ विशेष रूप से ग्रीनपीस पर कार्रवाई की अमेरिका ने आलोचना की। ग्रीनपीस पर विदेशों से फंड लेने पर रोक के साथ ही पिछले साल सितंबर में पंजीकरण रद्द कर दिया गया था। वाशिंगटन ने ऐसी कार्रवाई पर चिंता जताई थी।