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दुनिया को भारत की रिकॉर्ड उपलब्धि पर आश्चर्य, विदेशी मीडिया बोला ‘सलाम इंडिया’

Thu, 16 Feb 2017 11:20 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ वाशिंगटन
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सांकेतिक चित्र
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मंगलयान की महान कामयाबी के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान यानी इसरो ने बुधवार को सफलता का जो परचम फहराया है उसे पूरी दुनिया आश्चर्य की दृष्टि से देख रही है। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी भारतीय वैज्ञानिकों को बधाई दी है। बहुत कम खर्च पर मंगलयान छोड़ने के बाद एक साथ 104 उपग्रहों की रिकॉर्ड लांचिंग करने वाले इसरो के कारनामे को पूरी दुनिया ने सराहा है। लेकिन दुनिया को यह जानकर और भी आश्चर्य होगा कि इसरो ने अपने सफर की शुरूआत साइकल और बैलगाड़ी से की थी। 
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डॉ. विक्रम साराभाई द्वारा 15 अगस्त 1969 में इसरो की स्थापना की गई थी। तब देश के वैज्ञानिक पहला रॉकेट साइकल से प्रक्षेपण स्थल तक ले गए थे। दूसरा रॉकेट काफी भारी और बड़ा था इसलिए उसे बैलगाड़ी पर लादकर प्रक्षेपण स्थल तक ले जाया गया। उस वक्त नारियल के पेड़ों को लांचिंग पैड बनाया गया था। अमेरिकी मीडिया ने माना कि तब किसी को नहीं पता था कि आगे चलकर इसरो का हाथ थामना दुनिया के किसी भी देश के लिए आसान नहीं रह जाएगा। प्रसिद्ध अखबार ‘दि वाल स्ट्रीट जर्नल’ ने कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने रूस को मात दे दी है। 

‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने अंतरिक्ष के इस सफर को ‘सलाम इंडिया’ कहते हुए सराहना की। ‘सीएनएन’ ने कहा कि अब अमेरिका वर्सेस रूस को भूल जाइए क्योंकि मैदान में भारत आ चुका है। जर्मनी की प्रख्यात रेडियो सेवा ‘दाइचे वेले’ ने भारत द्वारा 104 सेटेलाइटों की लांचिंग के तुरंत बाद अपने समाचारों में कहा कि - ‘भारत ने बड़ा जोखिम उठाया है क्योंकि असफलता आलोचना का तूफान लेकर आती, लेकिन इसरो ने सफलता का इतिहास रचकर दुनिया के ताकतवर देशों को चुनौती दे दी है।’ 
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चीन की समाचार एजेंसी ‘सिन्हुआ’ ने भारत द्वारा रूस का रिकॉर्ड तोड़ने की तारीफ की है। लंदन के ‘टाइम्स’ समाचार पत्र ने कहा है कि दुनिया के अंतरिक्ष क्लब में भारत ने जोरदार ढंग से एंट्री की है। यूके के ‘गार्जियन’ समाचार पत्र ने टिप्पणी की कि भारत अंतरिक्ष में एक साथ रिकॉर्ड उपग्रहों को छोड़कर निजी स्पेस बाजार में गंभीर खिलाड़ी के रूप में आगे बढ़ा है। ‘बीबीसी’ ने कहा कि आज का सफलता इस बात का संकेत है कि भारत अंतरिक्ष बाजार के अरबों डॉलर के बाजार में तेजी से उभरेगा। 

बृहस्पति और शुक्र मिशन पर जुटेगा इसरो

- फोटो : Getty Images
मंगलयान के बाद 104 उपग्रहों की लांचिंग करने से इसरो के वैज्ञानिक उत्साहित हैं। इसरो की नजरें अब बृहस्पति और शुक्र तक पहुंचने के अंतरग्रहीय मिशन पर हैं। इसरो के सहायक निदेशक नागेश्वर राव पहले ही इसकी पुष्टि कर चुके हैं। इस अभियान के तहत यह विश्लेषण किया जाएगा कि हमें किस तरह के उपग्रह बनाने होंगे और किस प्रकार के रॉकेट की जरूरत होगी। हालांकि इस काम में कुछ वर्ष लग सकते हैं।

ट्विटर पर उड़ा पाकिस्तान का मजाक

इसरो की उपलब्धि पर एक तरफ सोशल मीडिया में जबरदस्त तारीफ हो रही है और दूसरी तरफ ट्विटर पर पाकिस्तान का मजाक बनाया जा रहा है। इसके लिए कई रोचक तस्वीरों का सहारा भी लिया गया है। यूजरों ने कहा है कि पाकिस्तान इसरो के 104 उपग्रहों का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए एक बार में 105 आतंकवादियों को भेजेगा। कुछ यूजरों ने कहा कि इस उपलब्धि के लिए चीन और पाकिस्तान को बर्नोल की जरूरत पड़ेगी।

30 मिनट में पूरा हुआ टेक-ऑफ से लेकर उपग्रहों को कक्षा में छोड़ने का मिशन

इसरो - फोटो : self
भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने बुधवार को एक साथ 104 उपग्रह लांच कर विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए इतिहास रच डाला। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से एक ही रॉकेट से इतने सारे उपग्रह और एक रॉकेट छोड़कर इसरो रूस से भी आगे निकल गया जिसने 2014 में एक साथ 37 उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया था। 

इसरो के लिए यह प्रक्षेपण जोखिम भरा था, क्योंकि असफलता की स्थिति में दुनिया में भारत की जबरदस्त किरकिरी हो जाती, लेकिन इसरो ने पीएसएलवी द्वारा एक उपग्रह और 103 नैनो उपग्रहों को कुशलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कराया और दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया।

श्री हरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारतीय समयानुसार 9:28 बजे पोलर सेटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) ने उड़ान भरी। धधकते इंजनों की सहायता से यह रॉकेट 27,000 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार भरता हुआ अंतरिक्ष की ओर रवाना हुआ और लांच के 11 मिनट बाद ही रॉकेट ने उपग्रहों को उनकी कक्षा में छोड़ना शुरू कर दिया। 11 मिनट बाद सभी सेटेलाइट्स निर्धारित कक्षा में स्थापित हो चुके थे। इसरो के मुताबिक टेक ऑफ से लेकर रिलीज तक यह पूरा मिशन 30 मिनट में पूरा हो गया।

इससे पहले एक बार में सबसे अधिक उपग्रह भेजने का विश्व रिकॉर्ड रूस के नाम था, जिसने जून 2014 में एक साथ 37 उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कराया था। इसके बाद भारत ने 2016 में भी दूसरे देशों के 22 सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे थे।

इसरो के अध्यक्ष ए.एस. किरण कुमार ने जब घोषणा की कि सभी 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में प्रवेश करा दिया गया है तो मिशन कंट्रोल सेंटर के वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे। किरण कुमार ने कहा, ‘इस अद्भुत कामयाबी के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।’ सफल लांचिंग के बाद सबसे पहले बधाई देने वालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे। उन्होंने ट्विटर पर इस लांचिंग को देश और वैज्ञानिकों के लिए गर्व का पल बताया। 

कार्गो में शामिल रहे 714 किलोग्राम से 1.1 किलो वजन तक के उपग्रह

ISRO - फोटो : pti
इसरो द्वारा आज रचे गए इतिहास में अमेरिका के सबसे अधिक 96 उपग्रह शामिल थे जबकि इजराइल, कजाकिस्तान, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड और यूएई के एक-एक उपग्रह थे। रॉकेट में भारत के उपग्रहों की संख्या मात्र 3 थी। पीएसएलवी के कार्गो में सबसे भारी 714 किलोग्राम वजनी ‘अर्थ ऑब्जर्वेशन सेटेलाइट’ था और सबसे हल्के उपग्रह का वजन सिर्फ 1.1 किलोग्राम था। अब इसरो बृहस्पति और शुक्र तक पहुंचने की तैयारी में जुटा है।

दुनिया में सबसे सस्ती लांचिंग के लिए भारत ने लहराया सफलता का परचम
पीएसएलवी का यह 39वां सफल मिशन है। इस बीच सफल और किफायती अंतरिक्ष प्रोग्राम में भारत ने दुनिया के भीतर विशिष्ट पहचान बना ली है। 2013 में इसरो ने महज 7.3 करोड़ डॉलर में मंगल तक अपना रॉकेट पहुंचाया था, जबकि ऐसा ही रॉकेट भेजने में अमेरिकी एजेंसी नासा को 67.1 करोड़ डॉलर खर्च करना पड़े थे।

फोन व इंटरनेट की बढ़ती संख्या के कारण अंतरिक्ष में सेटेलाइट छोड़ने का अरबों डॉलर का कारोबार है। इस कारोबार पर इसरो ने बहुत कम खर्च में लांचिंग सेवा देकर भारत को अमेरिका, यूरोप, रूस, चीन और जापान के मुकाबले कहीं ज्यादा अच्छा स्थान दिला दिया है।

- ‘इसरो को पीएसएलवी-सी37 के सफल प्रक्षेपण के लिए बधाई। अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में आज का दिन मील का पत्थर साबित होगा। इस उपलब्धि के लिए पूरे देश को इसरो पर गर्व है। इसरो के इस प्रदर्शन ने भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को साबित किया है। मेरा अनुरोध है कि इसरो हमारे अंतरिक्ष क्षमताओं की प्रगति के लिए प्रयास जारी रखे।’
प्रणब मुखर्जी, राष्ट्रपति

- ‘मैं इस असाधारण उपलब्धि पर इसरो के वैज्ञानिकों की पूरी टीम को बधाई देता हूं। इसरो की यह एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के समुदाय और राष्ट्र के लिए गर्व का क्षण है। भारत देश के इन वैज्ञानिकों को सलाम करता है।’
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

- ‘भारत ने अंतरिक्ष, वैज्ञानिक उपलब्धियों के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन किया है, एक बार फिर हमारा देश गौरवान्वित हुआ है। सभी वैज्ञानिकों और सहायक कर्मियों को बधाई। इससे एक बार फिर हमारे पूर्वजों के दृष्टिकोण का सम्मान हुआ है, जिन्होंने देश के लिए वैज्ञानिक आधार का निर्माण किया।
सोनिया गांधी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता
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कामयाब मिशन की खास बातें 

- फोटो : self
1. इसरो ने 101 विदेशी और तीन भारतीय उपग्रह एक साथ छोड़े। 
2. एजेंसी ने लांचिंग के लिए पोलर सेटेलाइट लांच व्हिकल (पीएसएलवी) का इस्तेमाल किया। इसमें पृथ्वी की कक्षा के लिए एक 714 किलो का मुख्य उपग्रह था जबकि शेष 103 छोटे उपग्रहों का कुल वजन 664 किलोग्राम था। 
3. ज्यादातर नैनो सेटेलाइट इजराइल, कजाकिस्तान, नीदरलैंड, स्विटजरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के थे। अमेरिका के सबसे ज्यादा 96 उपग्रह थे।
4. एक निर्धारित शुल्क लेकर अंतरिक्ष में व्यावसायिक सेटेलाइट स्थापित करना इन दिनों एक बढ़ता कारोबार बन गया है। इसकी बड़ी वजह यह है कि देशों के अलावा फोन, इंटरनेट और अन्य कंपनियां अधिक से अधिक हाई-टेक कम्युनिकेशन हासिल करना चाहती हैं। 
5. इसरो ने 2013 में मंगल की कक्षा में महज 7.30 करोड़ डॉलर के खर्च पर एक मानवरहित रॉकेट भेजा था जबकि नासा के कुशल मार्स मिशन का खर्च 67.10 करोड़ डॉलर था। 
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