पिछले महीने, डोनाल्ड ट्रंप ने खुद ही अप्रत्याशित रूप से घोषणा की थी कि उन्होंने उत्तर कोरिया की सीधी बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इससे पहले, किसी अमरीकी राष्ट्रपति की उत्तर कोरिया के शासक से कभी आधिकारिक मुलाकात नहीं हुई है। ट्रंप ने संवाददाताओं से यह भी कहा कि यह बातचीत जून या इससे कुछ पहले हो सकती है। उत्तर कोरिया पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को न मानने के आरोप लगते रहे हैं।
परमाणु कार्यक्रम की वजह से भी उत्तर कोरिया विश्व बिरादरी में अलग-थलग स्थिति में है। उत्तर कोरिया ने अब तक छह परमाणु परीक्षण किए हैं और उसने लंबी दूरी की ऐसी मिसाइल का भी परीक्षण किया जो अमेरिका तक पहुंच सकता है। हालांकि, शीतकालीन ओलंपिक खेलों के कारण बातचीत का अच्छा अवसर मिला और तब से केवल कुछ हफ्तों में ही दक्षिण कोरिया के साथ ही चीन के कई प्रतिनिधिमंडलों ने उत्तर कोरिया का दौरा किया।
मीटिंग कब होगी?
ट्रंप ने कहा था कि यह वार्ता जून के बाद नहीं होनी चाहिए जिसे व्हॉइट हाउस ने गंभीरता से लिया है। हालांकि, पोम्पियो की गुप्त यात्रा की इस खबर ने निश्चित ही उत्तर कोरिया के पड़ोसी और इस क्षेत्र में अमेरिका के रणनीतिक साझेदार जापान और अमेरिका के बीच बातचीत की खबरों को दबा दिया है। किम के साथ ट्रंप की होने वाली बातचीत से जापान भी थोड़ा चिंतित दिख रहा है और प्रधानमंत्री शिंजो आबे बातचीत के लिए अमेरिका गए हैं।
ट्रंप ने आबे को फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में आमंत्रित किया है, जहां उन्होंने गोल्फ खेलने की योजना बनाई है। अमरीकी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच उत्तर कोरिया के मसले पर कोई मतभेद नहीं है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि आबे अमरीकी दौरे पर इसलिए गए हैं ताकि ट्रंप को उत्तर कोरियाई शासन पर बहुत ज्यादा दबाव की नीति को अपनाने के लिए राजी कर सकें।